धर्म

नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा का विधान है। भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठोर पूजा की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था।

इनके हाथों में खड्ग और कांटा है और गधा इनका वाहन है। परन्तु ये भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं। अतः इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं। इस बार मां के सातवें स्वरुप की पूजा 05 अक्टूबर को की जा रही

श्राद्ध में खीर बनाने के पीछे एक वजह ये है कि चावल को धर्म ग्रंथों में हविष्य अन्न कहा गया है यानी देवताओं का अन्न, जिसे अग्नि को अर्पित करने पर देवताओं सहित पितर भी तृप्त होते हैं।

मृत्यु जितना शाश्वत सच है, शास्त्र और पुराण भी उतना ही सत्य है। हम यही संस्कार अपनी पीढ़ी को स्थानांतरित कर रहे हैं।

हाथी का कान सूप जैसा मोटा होता है। गणेश जी को बुद्धि का अनुष्ठाता देव माना गया है।  मनुष्य के अंदर लोभ को अंत करने के लिए गणेश जी के इस रूप की पूजा विशेष फलदायी होती है। कर्क राशि के व्यक्तियों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।

इसके बाद रथकार एवं उसकी पत्नी ने अमावस्या को भगवान विश्वकर्मा की पूजा की, जिससे उसे धन-धान्य और पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और वे सुखी जीवन व्यतीत करने लगे। उत्तर भारत में इस पूजा का काफी महत्व है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का दिन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है इसलिए उनकी कृपा पानी है तो श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर इन आसान उपायों को आज़माइए। फिर देखिए कैसे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा आप पर बरसती है और किस तरह से आपकी समस्त मनोकामनाएं हकीकत में तब्दील होती हैं।

ऋग्वेद अतिप्राचीन असाधारण काव्य रचना है। इसके भीतर ऋग्वेद से भी पूर्व के वैदिक समाज के विवरण हैं। ऋग्वेद की भाषा व्यवस्थित है। इस स्तर की भाषा के विकास के लिए हजार दो हजार वर्ष का समय पर्याप्त नहीं है।

ऐसा माना जाता है कि मंदिरों में अक्सर कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता या फिर फॉर्मल कपड़े पहनकर जाना ही सही है। औरतों के अलावा पुरुषों के लिए भी मंदिरों में जाने के लिए कुछ नियम और कायदे हैं।

इस साल सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर कई शुभ संयोग बने हैं जो भक्तों के लिए काफी लाभदायक है।