नागरिकता बिल

संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के साथ ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धर्म के चलते प्रताड़ित होकर भारत आए गैर-इस्लामी धर्म को छोड़कर हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों की नागरिकता का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित इस समिट में कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का निर्णय राजनीतिक रूप से कठिन लग सकता है लेकिन इस फैसले ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों में विकास की नई उम्मीद जगाई है।

संजय राउत बोले कि शिवसेना पहले से ही ये बात कहती आ रही है कि घुसपैठियों को बाहर निकालना चाहिए, पाकिस्तान-बांग्लादेश-अफगानिस्तान से जो हिंदू-सिख-बौद्ध-जैन आ रहे हैं उनके मसले पर वह केंद्र सरकार के साथ है।

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में तृणमूल कांग्रेस और एआईयूडीएफ सांसदों ने संसद भवन परिसर में मंगलवार को एक अनोखे...