नागरिकता संशोधन विधेयक

नागरिकता संसोधन बिल पर सांसद मीनाक्षी लेखी ने पेश किए ऐसे आंकड़े जिससे विपक्ष को जवाब देते नहीं बना

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अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने भारत के उस नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) से खुलकर असहमति जताई है, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।

सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल या नागरिकता संशोधन विधेयक का राज्यसभा में भारी बहुमत से पास होना तय है। सरकार ने इसलिए पूरी तैयारी कर रखी है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैरमुस्लिम शरणार्थियों के लिए भारत में नागरिकता का रास्ता साफ करने वाले नागरिकता संशोधन विधेयक पर अब राज्यसभा में सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है।

बिहार में सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) ने मंगलवार को लोकसभा में भले ही नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया है, परंतु अब इसे लेकर पार्टी के अंदर ही विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। पार्टी के उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पार्टी के इस फैसले को निराशाजनक बताया है।

महाराष्ट्र में एनसीपी, कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रही शिवसेना ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) का समर्थन करने का फैसला किया है। जबकि कांग्रेस ने पहले ही इस विधेयक को 'असंवैधानिक' करार दिया है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पेश करने वाले हैं। यह विधेयक लोकसभा के दैनिक कामकाज के तहत सूचीबद्ध है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस विधेयक को लेकर विपक्ष की ओर से विरोध के स्वर उठ रहे हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दी थी।

संघ का मानना है कि सिटीजन अमेंडमेंट बिल का समर्थन बीजेपी विरोधी दल भी करेंगे और ये आसानी से संसद के दोनों में पास हो जाएगा।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस मांग को 2003 में तब विपक्ष के नेता मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में उठाया था। वही कांग्रेस जो अभी सरकार के द्वारा लाए इस बिल का विरोध कर रही है वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय संसद में खड़े होकर इस बात के लिए सरकार को तैयार करने के लिए दवाब बनाने की कोशिश कर रही थी।

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