नासा

नासा ने गुरुवार को मंगल मिशन ‘मार्स 2020’ लॉन्च किया। नासा का यह मिशन इस साल दुनिया का तीसरा मंगल मिशन है।

केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाला नैनीताल के आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के मुताबिक इस सूर्यग्रहण को अफ्रीका, एशिया और यूरोप के कई देशों के साथ ही उत्तर भारत में भी देखा जा सकेगा।

2011 के बाद ऐसा पहली बार होगा जबकि चालक दल मिशन के यूएस अंतरिक्ष यात्री अमेरिकी धरती से स्वदेशी रॉकेट से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसबीएन) के लिए प्रस्थान करेंगे। स्पेस-एक्स ने कहा कि लॉन्च को इसलिए टाला गया क्योंकि मौसम फ्लाइट पाथ के अनुरुप नहीं था।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के सिवन ने कहा कि हमने पहले ही विक्रम लैंडर को ढूंढ लिया था। सिवन ने कहा, नासा से पहले हमारे ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर को ढूंढा था और इसकी जानकारी हमने अपनी वेबसाइट पर भी डाली थी। आप वहां जाकर देख सकते हैं।

अंतरिक्ष में रुचि लेने वाले एक भारतीय द्वारा अमेरिका के ऑर्बिटिंग कैमरा से चंद्रमा की तस्वीरों का निरीक्षण करने के बाद नासा ने कहा कि उसे भारतीय चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर का दुर्घटनास्थल और मलबा मिला है।

भारत के भारी रॉकेट, जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल-मार्क 3 ने 22 जुलाई को 978 करोड़ रुपये लागत का एक टेक्स्ट बुक स्टाइल का चंद्रयान-2 अंतरिक्ष में लांच किया था।

दिल्ली सरकार ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा जारी की गई एक तस्वीर साझा की है, जिसमें दिल्ली के आसपास के राज्यों में बड़े पैमाने पर पराली जलती हुई दिख रही है।

ह्यूंदै ने अपने एयर मोबिलिटी डिविजन का हेड नासा के अनुभवी एयरोनॉटिक्स इंजीनियर डॉक्टर जयोन शिन को बनाया है। शिन हाल में नासा के एरोनॉटिक्स रिसर्च मिशन डायरेक्टरेट के प्रमुख रहे हैं।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है। नासा के अनुसार, लैंडर विक्रम की चांद के सतह पर हार्ड लैंडिंग हुई थी। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग के दौरान विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया था।

अंतरिक्ष में भेजी गई ये सैटेलाइट महज 64 ग्राम की है। ये सैटेलाइट 4cmx4cmx4cm बीते 20 जून को भारतीय समय के अनुसार साढ़े 3 बजे वर्जीनिया अमेरिका में नासा की wallops फ्लाइट फैसिलिटी से लॉन्च की गई