नोटबंदी

नोटबंदी का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य लेनदेन में नकदी का इस्तेमाल घटाना और लोगों को भुगतान के लिए गैर-नकदी माध्यमों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना था, लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी का उपयोग घट नहीं रहा है।

8 नवंबर 2016, ये वो तारीख है जिस दिन देश में एक बहुत बड़ा बदलाव आया था। पीएम मोदी ने काले धन का सच सामने लाने के लिए नोटबंदी का फैसला लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ऐलान कर बताया कि अब 500 और 1000 के नोट का प्रचलन बंद हो जाएगा।

नोटबंदी को लेकर यूथ कांग्रेस ने किया प्रदर्शन

नोटबंदी के तीन साल पूरा होने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि नोटबंदी एक ‘आपदा’ साबित हुई है जिसने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया।

मनमोहन सिंह ने कहा कि अर्थव्यवस्था अब तक नोटबंदी और जीएसटी जैसे मानवीय कुप्रबंधन से उबर नहीं पाई है। भारतीय अर्थव्यवस्था इन दिनों मंदी की मार से जूझ रही है।

राहुल ने आरोप लगाया कि दबाने और डराने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि मैं इससे नहीं डरता हूं। राहुल ने कहा कि यह संविधान की लड़ाई है। देश के भविष्य की लड़ार्ई है। भ्रष्टाचार और अत्याचार के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने कहा कि मैं खड़ा रहूंगा, लड़ता रहूंगा।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में भारत में ई-मनी के जरिए 345.9 करोड़ हस्तांतरण हुए। इस मामले में भारत सिर्फ जापान और अमेरिका से पीछे रहा। हालांकि चीन का इस संबंध में आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। 

वर्ष 2016-2018 के बीच करीब 50 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां गंवा दी है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नौकरियों में 'गिरावट की शुरुआत' नोटबंदी के साथ शुरू हुई। हालांकि इन रुझानों का 'कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया जा सका है।'

जयराम रमेश ने कहा कि नोटबंदी को लेकर दायर किए गए आरटीआई (RTI) में खुलासा हुआ कि पेट्रोल पंप पर 500 और 1000 के कितने नोट आए इसका आंकड़ा ही नहीं है।

नई दिल्ली। नए साल के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसी एएनएई को अपना साक्षात्कार दिया। एएनआई की...