पूजा

प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और इसमें चावल, लाल फूल, लाल चंदन भी डालें। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाएं। इस दौरान सूर्य मंत्र ‘ऊँ सूर्याय नम:’ का जाप करें।

मंगल और राहु की शांति के लिए निर्दिष्ट दान के साथ वैदिक मंत्रों के जप ओर दशांश मंत्रों हवन करना लाभकारी होता है। अंगारेश्वर महादेव, उज्जैन पर अधिक प्रभाव मिलेगा।

जब तृतीयेश, यतुर्थेश या दशमेश की उपरोक्त स्थितियां। तृतीयेश व अष्टमेश का संबंध होने पर छोटे भाई बहनों, चतुर्थ के संबंध से माता, एकादश के संबंध से बड़े भाई, दशमेश के संबंध से पिता के कारण पितृ दोष की उत्पत्ति होती है।

कन्या राशि – इस महीने आकस्मिक खर्च से चिन्ता बढ़ सकती है। क्रोध न करे क्रोध के कारण बहुत नुक्सान होने के योग बन रहे है। सोच-समझकर ही कही पर पैसा निवेश करे, अचानक कोई फैसला न ले।

इसी तरह के सवालों के जवाब के लिए आपको ये समझ होनी आवश्यक है कि जिस स्थान में पाप ग्रह या कुपित ग्रह या नीच का ग्रह बैठा है उस घर से सम्बंधित सभी रिश्तों से आपको निराशा ही मिलेगी |

राहु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते है।

शनि का गोचर आपके ग्यारहवें भाव में हो रहा है। कुंडली में ग्यारहवें भाव से आय का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपकी आय को बढाएगा।

शास्‍त्रों में कहा गया है कि शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश भैरवाष्टमी के दिन व्रत और पूजा-अर्चना करने से होता है। मान्यताओं के अनुसार,सभी तरह के पाप इस दिन भैरव बाबा की विशेष पूजा अर्चना करने से धूल जाते हैं। श्री कालभैरव जी के दर्शन और पूजा इस तिथि पर करने से शुभ फल मिलता है।

पद्म पुराण में श्री भीष्म पंचक व्रत की महिमा का वर्णन इस प्रकार से है। भीष्म पंचक व्रत में चार द्वार वाला एक मंडप बनाया जाता है। मंडप को गाय के गोबर से लीप कर मध्य में एक वेदी का निर्माण किया जाता है।

छठ पर्व पर पहला अर्घ्य डूबते सूर्य को दिया जाता है। इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है। इससे भगवान शिव और सूर्यनारायण की कृपा से उत्तम संतान का महावरदान मिलता है।