पूजा

इस साल छठ पर्व 31 अक्टूबर को 'नहाय-खाय' से शुरू होगा, और तीन नवंबर को 'पारण' के साथ समाप्त हो जाएगा। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की पष्ठी को मनाया जाता है।

इस पूजन के पश्चात तिजोरी में गणेशजी तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें।

अब पूजन में शामिल सभी लोगों को तिलक लगाकर अक्षत लगाएं और दाएं हाथ में मौली बांधें। महिलाऐं खुद के हाथ से चूड़ी पर या माथे पर रोली से बिंदी लगाएं। महिलाओं के बाएं हाथ में मौली बांधें।

धनतेरस के दिन बर्तन व अन्‍य कई तरह की चीजें खरीदने की परंपरा और मान्‍यता है। वहीं इस दिन सोने की खरीदारी करना सबसे ज्‍यादा शुभ माना जाता है।

दिवाली की रात पीपल के नीचे तेल का दीपक ज़रूर जलाएं। यदि पीपल ना हो तो किसी चौराहे पर दीपक जला कर पीछे पलट कर मत देखें और चुपचाप अपने घर को लौट आएं।

माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है।

शिवलिंग को कभी भी अंधेरे स्थान या बंद कमरे में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से शिवलिंग नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करने लगता है, जिसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।

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यह पूजा नवमी तिथि पर की जाती है। महानवमी पर शक्ति पूजा भी की जाती है जिसको करने से निश्चित रूप से विजय की प्राप्ति होती है। आज के दिन महासरस्वती की उपासना भी होती है जिससे अद्भुत विद्या और बुद्धि की प्राप्ति हो सकती है।

नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा का विधान है। भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठोर पूजा की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था।