पूर्वी लद्दाख

इस दौरान व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव ने भारत और चीन के बीच मध्यस्थता के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि अभी कोई औपचारिक तैयारी नहीं है।

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत व चीन के बीच हुई हिंसक झड़प में शहीद होने वाले एक कमांडिंग ऑफिसर सहित 20 सैनिक देश के लगभग सभी हिस्सों के रहने वाले थे।

भारत और चीनी सेना के बीच सीमा पर सोमवार को हुई हिंसक झड़प में शहीद हुए 20 जवानों के नामों की सूची बुधवार को जारी कर दी गई है।आर्मी ने इन शहीदों के नाम की पूरी लिस्ट जारी की है। 

पीएम मोदी ने कहा कि, मैं देश को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। हमारे लिए भारत की अखंडता और संप्रभुता सर्वोच्च है और इसकी रक्षा करने से हमें कोई भी रोक नहीं सकता। भारत शांति चाहता है लेकिन भारत उकसाने पर हर हाल में यथोचित जवाब देने में सक्षम है।

लद्दाख में जो कुछ हुआ उसको देखते हुए भारत की तरफ से 22 जून की मीटिंग को लेकर क्या रूख अपनाया जाएगा, इसपर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

यूएस न्यूज में छपी एक खबर के मुताबिक, अमेरिका इस पूरी स्थिति पर काफी गंभीरता से नज़र बनाए हुए है। भले ही चीन ने उसके नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि न की हो, लेकिन अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी माना है कि चीन का भारत से ज्यादा नुकसान हुआ है

भारत और चीन की सेनाओं के बीच जारी तनाव पर अमेरिका का रिएक्शन आया है। अमेरिका ने कहा है कि वह लद्दाख सीमा पर जारी इस तनाव की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है।

राजनाथ सिंह ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ साउथ ब्लॉक में बैठक करने के बाद मोदी से मुलाकात की। 1975 के बाद से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ संघर्ष में भारतीय सेना के जवानों के शहीद होने की यह पहली घटना है।

बताया जा रहा है कि सोमवार रात को गलवान घाटी के पास जब दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद सबकुछ सामान्य होने की स्थिति आगे बढ़ रह थी। तब दोनों देशों के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ गया। 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने गलवां क्षेत्र में, पैट्रोलिंग बिंदु 15 और हॉट स्प्रिंग एरिया से अपने सैनिकों और युद्धक वाहनों को ढाई किलोमीटर पीछे किया है। भारत ने भी अपनी कुछ टुकड़ियां पीछे हटाई हैं।