प्रकृति

पूर्वज अनुभूति में पृथ्वी सजीव है। यह निर्जीव नहीं है। लाखों जीवों की धारक है। इसी में उगना उदय और अस्त होना प्रत्येक प्राणी की नियति है। यह जननी है। पृथ्वी को माता कहने वाले यह ऋषि अंधविश्वासी नहीं हैं।

नई दिल्ली। कालद्रव्य बदल गया है। समय भी प्रदूषण का शिकार है। दिमाग भी स्वस्थ नहीं। मन और आत्म द्रव्य...