प्रयागराज

पौष पूर्णिमा यानी 21 जनवरी से कल्पवास की शुरुआत हो गई है और यह अब माघी पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। मानव जीवन के लिए कल्पवास को आध्यात्मिक विकास का माध्यम माना जाता है, जिसके जरिए आत्मशुद्धि का प्रयास किया जाता है। प्रयागराज में चल रहे कुंभ में करोड़ों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

अमृत प्राचीन प्यास है। कोई मरना नहीं चाहता लेकिन सभी जीव मरते हैं। मृत्यु को शाश्वत सत्य कहा गया है। जीव मृत्यु बंधु है। मृत और अमृत परस्पर विरोधी जान पड़ते हैं पर हैं दोनों साथ-साथ।

नई दिल्ली। प्रयागराज में चल रहे आस्था के महाकुंभ में हजारों श्रद्धालुओं ने अबतक शिरकत की है। इसके साथ ही इस...

नई दिल्ली। कुंभ 2019 का आगाज शाही स्नान के साथ ही मंगलवार से शुरू हो चुका है। देश-दुनिया से लोगों...

नई दिल्ली। प्रयागराज कुंभ में मंगलवार को मकर संक्रांति पर पहला शाही स्नान शुरू हो चुका है। इस स्नान की शुरुआत सुबह...

नई दिल्ली। आस्था के संगम कुंभ में लाखों की संख्या में लोग जमा होते हैं, ऐसे में वहां बच्चों के...

नई दिल्ली। मंगलवार से प्रयागराज में शुरू होने वाले कुंभ में एक हादसा हो गया है। सोमवार सुबह यहां स्थित...

लखनऊ/प्रयागराज। प्रयागराज में कुंभ के प्रमुख स्नान के दौरान अक्षयवट के दर्शन नहीं हो सकेंगे। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान...

नई दिल्ली। प्रयागराज में कल से कुंभ मेला शुरू होने जा रहा है। इसी दिन पहला शाही स्नान भी होगा।...

नई दिल्ली। प्रयागराज में 15 जनवरी से शुरू होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस...