बहुजन समाज पार्टी

इन छह विधायकों के शामिल होने से गहलोत सरकार पूर्ण बहुमत में आ गई है। बीएसपी विधायकों ने सोमवार देर रात कांग्रेस की सदस्यता ली। रात 10:30 बजे सभी विधायक विधानसभा पहुंचे और कांग्रेस में शामिल हुए।

उन्होंने मायावती को बेईमान बताया है जो अधिकतम फायदा लेने के बाद दूसरों को धोखा दे देती हैं। यहां मीडिया से एक अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा, "मायावती बिजली के नंगे तार जैसी हैं। उन्हें जो भी छुएगा, मर जाएगा।"

उन्होंने मंगलवार को ट्वीट किया, "उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा पेट्रोल व डीजल की कीमत में भारी वृद्धि महंगाई बढ़ाने व करोड़ों गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के पेट पर लात मारने वाला क्रूर कदम है। बदतर कानून-व्यवस्था, महंगाई व बेरोजगारी से त्रस्त जनता का दु:ख और बढ़ेगा। सरकार जनहित पर ध्यान केंद्रित करे तो बेहतर है।"

मायावती ने ट्वीट किया, "संविधान की 'सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक न्याय' की मंशा को देश भर में लागू करने हेतु जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा संबंधी धारा 370 व 35ए को हटाने की मांग काफी लम्बे समय से थी। अब बसपा उम्मीद करती है कि इस संबंध में केंद्र सरकार के फैसले का सही लाभ वहां के लोगों को आगे मिलेगा।"

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 को हटाने का संकल्प पेश किया। यह अनुच्छेद जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करता है। संकल्प पेश होते ही सदन में हंगामा शुरू हो गया।

राज्य में सत्ता बदले सात माह बीत गए हैं। इस दौरान दमोह जिले से बसपा विधायक रामबाई अपने बयानों और कार्यशैली के कारण सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने दिसंबर और जनवरी में आक्रामक रुख अपनाया और कई कर्मचारियों की पिटाई तक कर दी। जब उनका मंत्री बनने का मोह जागा तब उन्होंने कई अटपटे बयान दे डाले।

प्रदेश की कमलनाथ सरकार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से गठबंधन करके फिर मुसीबतों में पड़ गई है। अल्पमत में गई सरकार को सहारा देने वाली दो बसपा विधायकों में एक के पति एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता की हत्या के मामले में वांछित हैं।

मायावती का सबसे बड़ा फोकस अपने दलित वोट बैंक को वापिस खींचना है। वे अब खांटी दलित राजनीति की दिशा में लौटने की कवायद में हैं।

लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी तकरार लगातार जारी है। वहीं इन सबके बीच सुप्रीमो मायवाती ने ट्वीट कर समाजवादी पार्टी के साथ अपना गठबंधन आधिकारिक रूप से खत्म कर लिया है।  

मायावती ने कहा है कि अखिलेश ने मुझे संदेश भिजवाया कि मुसलमानों को ज्यादा टिकट नहीं दूं। इसके पीछे धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण होने का तर्क दिया गया। हालांकि मैंने उनकी बात नहीं मानी।