भारतीय अर्थव्यवस्था

Agriculture Bill: देर-सबेर जब किसानों (Farmers) को वास्तविकता का ज्ञान होगा तो इन दलों का ‘वोट बैंक का गुणा-गणित’ गड़बड़ा जायेगा। वास्तव में, ये विधेयक कृषि-उपज (Agricultural produce) की विक्रय-व्यवस्था (Sales arrangement) को व्यापारियों/आढ़तियों से मुक्त कराने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। साथ ही, बाजार के उतार-चढ़ावों से भी किसानों को सुरक्षा-कवच प्रदान करेंगे।

मोदी सरकार में मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने बताया कि किस तरह मोदी सरकार का 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना पूरा होगा।

भारत(India) ने तिमाही जीडीपी(GDP) के आंकड़े जब से जारी करने शुरू किये हैं, उसमें यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। इसके पहले अगर जीडीपी नेगेटिव होने बात करें तो यह 1979-80 में हुई थी, जब सालाना जीडीपी में 5.2 फीसदी की गिरावट आई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी बुधवार की शाम को बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के हितधारकों साथ बैठक करेंगे।

देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2021 में सिकुड़ सकती है, जबकि वित्त वर्ष 2020 में इसका 4.2 प्रतिशत की दर से विस्तार हुआ था। कैलेंडर वर्ष 2020 के संदर्भ में अर्थव्यवस्था नकारात्मक 4.9 प्रतिशत सिकुड़ सकती है। आईएमएफ ने हालांकि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर छह प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। 

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, एनएसई के 50 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी भी पिछले सत्र से 69.75 अंकों की गिरावट के साथ 10235.55 पर खुला और 10194.50 तक फिसला जबकि बाद में थोड़ी रिकवरी आने पर निफ्टी 10251.60 तक चढ़ा।

कोयला खदानों की नीलामी की बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया ऐसे समय में शुरू हुई है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से खुल गई है और विकास के रास्ते पर वापस लौटने के संकेत दे रही है।

रेटिंग एजेंसी फिच के अनुसार अगले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था फिर रफ्तार पकड़ सकती है।अगले साल भारत की अर्थव्यवस्था 9.5% की रफ्तार से बढ़ सकती है।

मूडीज के सहायक उपाध्यक्ष एवं विश्लेषक देबोराह टैन का कहना है कि कोरोनावायरस महामारी की रोकथाम के लिए जारी बंद की वजह से खपत कम होने और कारोबारी गतिविधियां थमने से चुनौतियों का सामना कर रही घरेलू अर्थव्यवस्था में गिरावट आएगी। इसकी वजह से 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिल सकती है। कोरोनावायरस के प्रकोप से पहले ही अर्थव्यवस्था पिछले छह वर्षों में धीमी गति से ही आगे बढ़ रही थी।

मोदी सरकार किसानों को लेकर बेहद संवेदनशील है। वित्तमंत्री के किसान पैकेज में कृषि से जुड़े क्षेत्रों के विस्तार के लिए कम दर पर कर्ज और निवेश संबंधी ऐलान हो सकते हैं।