भारतीय रेलवे

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच चीन को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, भारतीय रेलवे ने चीन को दिया गया 470 करोड़ का ठेका किया रद्द कर दिया है। इससे साफ जाहिर है कि सीमा विवाद की आंच कारोबार तक पहुंच चुकी हैं।

रेलवे बोर्ड, चेयरमैन, विनोद यादव ने 29 मई, तीन जून और नौ जून को लगातार तीन पत्र राज्यों को भेजा है , जिसमें कहा गया है कि राज्यों की मांग के अनुसार रेलवे 24 घंटों में श्रमिक स्पेशल ट्रेन उपलब्ध करा देगी।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एक ट्वीट को लेकर विवादों में घिर गई है। दरअसल प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों को रेलवे द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने श्रमिक ट्रेनों में 80 लोगों की मृत्यु का भी दावा कर दिया। जिसके बाद उनके इस ट्वीट पर भारतीय रेलवे ने पलटवार करते हुए करारा जवाब दिया है।

भारतीय रेल ने साफ किया है कि कोई भी ट्रेन अपने मार्ग से नहीं भटकी है। रेलवे बोर्ड के चेयरमेन विनोद कुमार यादव ने इस बात का खंडन किया है कि ट्रेनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 9 दिनों तक समय लगा है।

कोरोना संकट काल के बीच लगे लॉकडाउन की वजह से हर तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी। जिसके तहत यातायात भी रोक दिया गया।

भारतीय रेल 27 मई तक 3543 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन कर चुकी है। इस दौरान 26 दिनों में 48 लाख यात्रियों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाया जा चुका है।

लॉकडाउन से पहले जिन लोगों ने काउंटर पर यानी ऑफलाइन ट्रेनों के टिकट बुक करवाए थे और उनका टिकट कैंसिल हो गया था, उन्हें आज से रेलवे काउंटर्स पर पैसा वापस मिल रहा है। रेलवे 22 मार्च से 30 जून के बीच रिजर्वेशन काउंटर से बुक कराए गए टिकटों के रिफंड आज यानी सोमवार से दे रहा है।

भारतीय रेलवे ने रविवार को दावा किया कि उसने 2,813 श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं, जिससे अब तक 37 लाख से अधिक यात्रियों को भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि गुरुवार तक रेलवे ने 2,317 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया है और देश भर में 31 लाख से अधिक लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया है। रेलवे ने कई शहरों में 15 जोड़ी विशेष वातानुकूलित ट्रेनों का संचालन भी शुरू कर दिया है।

लॉकडाउन की वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए चलाये जा रहे श्रमिक स्पेशल ट्रेन की जैसे-जैसे मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे रेलवे के लिए यात्री डिब्बों का जुटाना मुश्किल हो रहा है।