भारत-चीन

केद्र सरकार ने भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को वाणिज्यिक दोहन के लिए कोयला खदान की जारी नीलामी में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया है।

भारत ने लद्दाख में 35,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। चीन 14 जुलाई को कोर कमांडर स्तर की बैठक के दौरान निकाले गए पुलबैक रोडमैप का पालन नहीं कर रहा है।

भारत-चीन से माल की आवक को प्रतिबंधित करने के तरीकों की तलाश में है, जिसे सिंगापुर और मलेशिया जैसे अन्य देशों के जरिए भारत में भेजा जा रहा है, जिनके साथ नई दिल्ली के व्यापार समझौते हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भारत को उन कंपनियों के लिए स्वामित्व पैटर्न का खुलासा करना अनिवार्य करना चाहिए जो भारत को माल की आपूर्ति कर रही हैं।

सीमा विवाद के बाद से भारत और चीन के बीच तनाव जारी है। एक तरफ जहां भारत सरकार ने चीन को सबक सिखाने के लिए कई बड़े कदम उठाए है। वहीं दूसरी ओर चौतरफा घिर ड्रैगन अब भारत की तारीफ के कसीदे पढ़ने लगा है।

भारत में ब्रिटिश हाई कमिश्नर सर फिलिप बर्टन ने कहा था कि उनका देश चीन द्वारा भारत सहित पूरे विश्व में पेश की जा रही चुनौतियों को लेकर सतर्क है।

मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने और चीनी प्रोडक्ट के इम्पोर्ट पर रोक लगाने के लिए कई रणनीति तैयार कर रही है। मोदी सरकार चीन से आयात किए जाने वाले कई रोजमर्रा के सामानों पर भारी भरकम टैक्स लगाएगी।

भारत अपनी तरफ से चीन के मौजूदा रवैये पर सख्त आपत्ति जता चुका है। भारतीय सेना ने चीन की पीएलए को साफ संदेश दे दिया है कि फिंगर-8 से वह पीछे जाएं और अप्रैल से पहले की स्थिति को बहाल किया जाए।

गलवान घाटी में विवाद के बिन्दु से चीन के पीछे हटने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर झाओ ने कहा, ‘‘अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिक पीछे हटने और तनाव कम करने के लिए प्रभावी कदम उठा रहे हैं और इस दिशा में प्रगति हुई है।’’

म्यांमार के विद्रोही संगठनों को उकसाने और पनपने देने के पीछे चीन की रणनीति अस्ल में, बेल्ट और रोड प्रोजेक्टों को लेकर मानी जा रही है। चीन म्यांमार के साथ इकोनॉमिक कॉरिडोर को मज़बूत करना चाहता है।

भारत द्वारा चीन की जिन ऐप पर रोक लगाई गई है उनमें टिकटॉक और यूसी ब्राउजर भी शामिल हैं, जो भारत में काफी लोकप्रिय हैं। पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा विवाद के बीच यह रोक लगाई है।