महत्व

छठ पर्व पर पहला अर्घ्य डूबते सूर्य को दिया जाता है। इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है। इससे भगवान शिव और सूर्यनारायण की कृपा से उत्तम संतान का महावरदान मिलता है।

ऋग्वेद में मनुष्य और देवों की प्रीति अनूठी है। वैदिक अभिजन सभी अवसरों पर देवों का स्मरण करते हैं। वे दुखी होते हैं तो देवों की स्तुतियां करते हैं और जब सुखी होते हैं तब भी लेकिन आनंद और उत्सव के समय वे देवों को ज्यादा याद करते हैं।

ऋग्वेद में दर्शन के बीज हैं। वे पौध बनने को आकुल व्याकुल हैं। अदिति और पुरूष जेसे प्रतीकों में वेदांत दर्शन का जन्म दिखाई पड़ता है। मन सम्बंधी प्रश्नों में परवर्ती योग दर्शन के सूत्र हैं। सांख्य वैशेषिक दर्शन व मीमांसा के भी सूत्र ऋग्वेद में हैं।