महाराष्ट्र

उन्होंने शिवसेना को साफतौर से जवाब देते हुए कहा कि, चुनाव प्रचार के दौरान मैंने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार ये कहा था कि, 'अगर हमारा गठबंधन जीतता है तो फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही होंगे'।

मगर अब इस राष्ट्रपति शासन के पीछे की बेहद दिलचस्प कहानी सामने आई है। इस फैसले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पत्र की अहम भूमिका रही जो उन्होंने मंगलवार सुबह राज्यपाल को भेजा था। 

अब भाजपा ने इन सब चीजों के लिए चुनावी रणनीतिकार और जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्याक्ष प्रशांत किशोर को जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा नेता प्रीति गांधी ने शिवसेना और भाजपा के गठबंधन के टूटने पर प्रशांक किशोर को निशाना साधा है

अस्पताल से बाहर आकर संजय राउत ने कहा कि, वो अब बिल्कुल ठीक हैं और जल्द ही महाराष्ट्र को अगला मुख्यमंत्री मिलेगा। उन्होंने ये भी कहा कि, सबसे बात चल रही है और अगला सीएम शिवसेना का होगा।

महाराष्ट्र में जारी सियासी संग्राम अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनने से पहले ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया है। राज्यपाल की सिफारिश को मंगलवार शाम को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति शासन को मंजूरी दी।

मुंबई में आज एनसीपी और कांग्रेस नेताओं की बैठक हुई। इसमें महाराष्ट्र में सरकार गठन पर चर्चा हुई। इस मीटिंग के बाद पत्रकारों से बात करते हुए प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि शिवसेना ने 11 नंवबर को हमसे आधिकारिक तौर पर संपर्क किया था।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है और राष्ट्रपति ने राज्यपाल की सिफारिश पर मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति ने कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दे दी है और अब महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को लागू कर दिया गया है।

महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें सियासत की नब्ज़ समझने वाला क्यों माना जाता है? शरद पवार ने अपने अनुभव से यह समझ लिया था कि शिवसेना किसी भी सूरत में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगी।

राज्य के राज्यपाल ङागत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति को राज्य की सियासी घटनाक्रम से अवगत कराया और पत्र लिखकर राज्य में धारा 356 लगाने की सिफारिश की है।

अब शिवसेना दोनों तरफ से फंसती नजर आ रही है। इन सबके बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर लोगों ने शिवसेना की जमकर खिंचाई की है।