माता-पिता

जब मृत व्यक्ति के अधूरे कार्य पूरे नहीं किए जाते तो उसकी आत्मा परिवार पर अप्रत्यक्ष रुप से कार्यों को पूरा करने के लिए दबाब डालती है। जिसके कारण परिवार में कई बार अशुभ घटनाएं घटित होती हैं। यही पितृदोष होता है।

पूर्वज अनुभूति में पृथ्वी सजीव है। यह निर्जीव नहीं है। लाखों जीवों की धारक है। इसी में उगना उदय और अस्त होना प्रत्येक प्राणी की नियति है। यह जननी है। पृथ्वी को माता कहने वाले यह ऋषि अंधविश्वासी नहीं हैं।

डीबीएचपीएस एक राष्ट्रीय महत्व रखने वाला संस्थान है। इसकी स्थापना सन् 1918 में महात्मा गांधी ने दक्षिणी राज्यों में हिंदी के प्रचार के उद्देश्य से की थी। यहां हिंदी की पहली कक्षा गांधी के बेटे देवदास ने ली थी।

भारतीय परंपरा में श्राद्ध का काफी महत्व है। त्रिपिंडी श्राद्ध करने का अधिकार विवाहित पति-पत्नी के जोड़े को होता है। जिसकी पत्नी जीवित नहीं है, उसे भी यह अधिकार है।