मायावती

इस बार चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों में से भाजपा, बसपा, कांग्रेस, सपा, भाकपा, माकपा ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 11 में से नौ सीटें जीती थीं।

राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल का कहना है कि इस बार ऐसा विपक्षी दलों ने अपने चुनाव प्रचार को उतनी गंभीरता से आगे नहीं बढ़ाया है। इस कारण इनका प्रचार उतना जोर नहीं पकड़ पाया है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बुधवार को कांशीराम को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्घांजलि अर्पित की। इस दौरान बसपा प्रमुख ने उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।

इन छह विधायकों के शामिल होने से गहलोत सरकार पूर्ण बहुमत में आ गई है। बीएसपी विधायकों ने सोमवार देर रात कांग्रेस की सदस्यता ली। रात 10:30 बजे सभी विधायक विधानसभा पहुंचे और कांग्रेस में शामिल हुए।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। रविवार रात लगभग आधे घंटे चली बैठक में कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा भी मौजूद रहीं।

हरियाणा में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच बताया जा रहा है। क्षेत्रीय पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) पहले ही दो फाड़ हो चुकी है।

उन्होंने मायावती को बेईमान बताया है जो अधिकतम फायदा लेने के बाद दूसरों को धोखा दे देती हैं। यहां मीडिया से एक अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा, "मायावती बिजली के नंगे तार जैसी हैं। उन्हें जो भी छुएगा, मर जाएगा।"

बहुजन समाज पार्टी ने एक बार फिर से मायावती के पार्टी की कमान सौंपी है और उन्हें निर्विरोध पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। बसपा की राष्ट्रीय मीटिंग में सर्वसम्मति से इस फैसले पर अमल किया गया।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार के समर्थन में आ गई हैं। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के अन्य नेताओं के बिना अनुमति जम्मू-कश्मीर दौरे पर सवाल उठाए। 

उन्होंने मंगलवार को ट्वीट किया, "उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा पेट्रोल व डीजल की कीमत में भारी वृद्धि महंगाई बढ़ाने व करोड़ों गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के पेट पर लात मारने वाला क्रूर कदम है। बदतर कानून-व्यवस्था, महंगाई व बेरोजगारी से त्रस्त जनता का दु:ख और बढ़ेगा। सरकार जनहित पर ध्यान केंद्रित करे तो बेहतर है।"