मुलायम सिंह यादव

एक तरफ जहां पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे हैं तो वहीं उन्हीं की परिवार की सदस्य इसका समर्थन कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के सरंरक्षक मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव ने इसे लेकर ट्वीट किया है।

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का आज 81वां जन्मदिन है। मगर उनका यह जन्मदिन बेटे और भाई की खींचतान में फंस गया है। इस खास मौके पर अखिलेश यादव व शिवपाल सिंह यादव अपने-अपने तरीके से उनका जन्मदिन मना रहे हैं।

मुलायम के जन्मदिन पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों अलग-अलग आयोजन करेंगी। प्रसपा कार्यकर्ता जन्मदिन को एकता दिवस के तौर पर मनाएंगे और सैफई में विराट दंगल होगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के संरक्षक और पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव मुलाकात की। वहीं मुलाकात के दौरान प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया और मुलायम के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव भी मौजूद रहे।

लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव दोनों के सामने अपने-अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की चुनौती है। यही वजह है कि दोनों के बीच जमी कड़वाहट की बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को आवंटित आलीशान बंगला और लोहिया ट्रस्ट कार्यालय का भवन खाली कराए जाने के बाद अब उनकी मंहगी एसयूवी मर्सिडीज कार भी वापस ली जाने वाली है।

उत्तर प्रदेश की योदी आदित्यनाथ सरकार ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के बाद अब मुलायम परिवार को बड़ा झटका दिया है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी सरकार ने मुलायम परिवार से लोहिया ट्रस्ट बिल्डिंग खाली करवा लिया है।

समाजवादी पार्टी ने अब जिस तरह से शिवपाल सिंह यादव की विधानसभा सदस्यता खारिज करने के लिए याचिका लगाई है, उससे पता चलता है कि वर्ष 2016 से पार्टी में वर्चस्व के लिए शुरू हुई चाचा-भतीजे की लड़ाई थमने के दूर-दूर तक आसार नहीं हैं।

14 सितंबर को अखिलेश रामपुर स्थित हमसफर रिजार्ट में धर्मगुरुओं, नगरपालिका अध्यक्षों, अधिवक्ताओं व महिला प्रतिनिधि मंडलों से भेंट करेंगे। इसके बाद अखिलेश जौहर विश्वविद्यालय जाएंगे और फिर आजम खान से उनके घर जाकर मुलाकत करेंगे।

गौरतलब है कि आजम खान और मुलायम सिंह यादव के बीच करीब 30 साल से भी पुरानी दोस्ती हैं, 1992 में जब मुलायम ने जनता दल से नाता तोड़ कर समाजवादी पार्टी का गठन किया था तो आजम खान मजबूती से उनके साथ खड़े रहे थे।