मेहुल चोकसी

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्‍ता संबित पात्रा (Sambit Patra) ने राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) की फंडिंग को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया हैं।

ईडी ने भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी के खिलाफ एक नया आरोपपत्र दायर किया है। इसमें विस्तारपूर्वक बताया गया है कि कैसे चोकसी ने लैब में बने हीरे और संपत्तियों को बेचकर भारत, दुबई और अमेरिका सहित शीर्ष वित्तीय संस्थानों में अपने ग्राहकों और उधारदाताओं को धोखा देने के लिए एक संगठित रैकेट चलाया। 

सीतारमण ने मेहुल चोकसी केस के बारे में जानकारी देते हुए लिखा कि सरकार ने बड़ा ऐक्शन लेते हुए भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की करीब 2387 करोड़ रुपये (1898 करोड़ जब्त और 489.75 करोड़ सीज) की चल-अचल संपत्ति को भी सरकार ने जब्त या सीज किया है। इसमें 961.47 करोड़ की विदेशी संपत्ति भी शामिल है।

मोदी सरकार की सख्ती ने हीरो के भगोड़े व्यापारी मेहुल चौकसी के होश फाख्ता कर दिए हैं। मेहुल चौकसी अब एजेंसियों के सामने हाथ जोड़कर खड़ा है। वह उनसे पूछताछ करने की गुहार कर रहा है।

सूरत शहर के एक अधिवक्ता मेहुल चौकसी ने बकायदा 9 साल के कड़े परिश्रम के बाद आखिरकार पीएम मोदी के विजन और उनके विकास कार्यों पर पीएचडी डिग्री हासिल कर ली है।

लंदन के जेल में बंद नीरव मोदी ने अपनी जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और जमानत याचिका दायर की थी। लेकिन अब कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है और 22 अगस्त तक नीरव मोदी जेल में ही रहना होगा।

बता दें कि 13 हजार करोड़ रुपये के इस बैंक घोटाले का सह आरोपी मेहुल चोकसी इन दिनों एंटीगुआ में रह रहा है। भारत सरकार भगोड़े मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है।

पंजाब नेशनल बैंक से करीब 14,00 करोड़ रुपये का घोटाला कर देश से फरार होने वाला कारोबारी नीरव मोदी को तगड़ा झटका लगा है। सिंगापुर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी की संपत्ति से 44 करोड़ रुपये जब्त करने के आदेश दिए हैं।

मोदी सरकार को मिली बड़ी सफलता मिली है। आपको बता दें कि एंटीगुआ में छिपा मेहुल चोकसी की नागरिकता को वहां की सरकार खारिज होनो वाली है। इसे भारत के लिए बड़ी सफलता की नजर से देखा जा रहा है।

प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) कहा है कि, चोकसी ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर अपने सेहत के बारे में जो दावा किया है, वो कोर्ट को गुमराह करने वाला है और चोकसी का हलफनामा निश्चित रूप से कानूनी प्रक्रिया में देरी करने का एक प्रयास है।