मोहन भागवत

महामारी काल में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 'वर्तमान परिदृश्य और हमारी' भूमिका विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि कोरोना से पूरी दुनिया जूझ रही है।

कोरोनावायरस के संकट के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अप्रैल से जून तक होने वाले 90 से अधिक कार्यक्रमों को निरस्त कर दिया है।

मोहन भागवत ने कहा, "पूर्व में दो-दो साल तक शाखाएं बंद रहीं। फिर भी संघ का काम चलता रहा। शासन-प्रशासन की नीति और सामूहिक अनुशासन का पालन समाज को करना है। सामूहिक अनुशासन का पालन संघ की शिक्षा रही है। इसके हम अभ्यस्थ हैं।"

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। मोहन भागवत ने झारखंड की राजधानी रांची में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रवाद शब्द की जगह राष्ट्र या राष्ट्रीय शब्द का इस्तेमाल होना चाहिए क्योंकि इसमें नाजी और हिटलर की झलक मिलती है।

इस दौरान उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में आये छात्र छात्राओं और स्वयंसेवकों को संबोधित किया।

संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, आरएसएस प्रमुख गणतंत्र दिवस गोरखपुर में ही मनाएंगे। भागवत 26 जनवरी की सुबह झंडा फहराएंगे और इसके बाद गोरखपुर में शाखा स्तर के स्वयंसेवकों से बातचीत करेंगे।

बरेली में मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण पर दिए गए अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि, 'मुझ से पूछा गया कितने बच्चे हों, मैंने कहा सरकार और सब तय करें, नीति बने, अभी पता नहीं, जनसंख्या समस्या और समाधान दोनों है।'

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक मोहन भागवत ने जनसंख्या वृद्धि के मुद्दे पर कहा है कि अब देश में दो बच्चों के कानून की जरूरत है।

इजराइल का उदाहरण देते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि, वहां के लोगों को स्वतंत्रता से पहले यह प्रस्ताव मिला था कि रेगिस्तान पर फिर से अपना देश बसाने पर उन्हें क्या मिलेगा, लड़ना भी बहुत पड़ेगा।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक बड़ा बयान दिया है। सरसंघचालक चार दिवसीय प्रवास पर बुधवार रात से मुरादाबाद में हैं। गुरूवार को प्रांत प्रचारकों के साथ बैठक में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मसलोम पर विमर्श किया।