म्यांमार

म्यांमार के कचिन राज्य में गुरुवार को एक हरिताश्म खनन क्षेत्र में भूस्खलन की चपेट में आने के बाद करीब 113 लोगों की मौत हो गई।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में खूनी संघर्ष के बाद पाकिस्तान और नेपाल दोनों देशों में ऐसी हरकतें बढ़ गई हैं।

बातचीत में विन मिन्त ने कहा कि म्यांमार चीन द्वारा डब्ल्यूएचओ और म्यांमार समेत अन्य देशों के कोविड-19 के मुकाबले में दिये गये समर्थन व मदद की प्रशंसा करता है।

सूत्रों के मुताबिक, इन 22 उग्रवादियों को विशेष विमान से भारत लाया गया है। इन उग्रवादियों को मणिपुर और असम की पुलिस को सौंपा जाएगा। जहां इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

म्यांमार का मानना है कि ताईवान चीन का एक अखंड भाग है। म्यांमार चीन के साथ साझे हित वाले समुदाय की रचना करना चाहता है।

अग्निशमन विभाग ने भूस्खलन में मारे गए लोगों की संख्या के बारे में जानकारी दी। क्षेत्र में आई भारी बाढ़ के कारण यह घटना घटी है। पीड़ितों की संख्या बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है।

विभाग के अधिकारी ने कहा कि अभी तक 13 शवों को प्राप्त कर लिया गया है और पांच लोगों की तलाश जारी है। बचावकर्मी दो सुरक्षाबलों को बचाने में कामयाब रहे, जिन्हें बाद में अस्पतला में भर्ती करा दिया गया।

प्रतिबंध के बारे में बताते हुए पोंपियो ने कहा कि इन सभी और इनके परिवारों के अमेरिका आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रतिबंध का हालांकि इन पर कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ता दिख रहा।

भारत के पूर्वोत्तर में हथियारों की सप्लाई करने वाले ग्रुप्स की कमाई टूटने के बाद अब म्यांमार सीमा पार के तस्करों ने समय के साथ अपने धंधे को बदल दिया है।

यांगून के बाहरी इलाके में बनी जेल से रिहा होने के बाद वा लोन ने बीबीसी से कहा कि वे पत्रकारिता करने से कभी पीछे नहीं हटेंगे। लोन और सू ओ को ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया था और पिछले साल सितंबर में उन्हें सात साल जेल की सजा सुनाई गई थी।