राष्ट्रपति शी जिनपिंग

उन्होंने कहा कि जब भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की बात आएगी तो वह ऐसी किसी हरकत को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन वह उकसाने पर हर हाल में मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।

इस लेख में लिखा गया है कि पर्वतारोहण भारतीय सेना का अनिवार्य गुण है। भारतीय सेना का हर जवान इसमें कुशल होता है। भारत ने बड़ी संख्या में प्रोफेशनल पर्वतारोहियों को भर्ती किया है, इसमें प्राइवेट सेक्टर के भी पर्वतारोही शामिल हैं।

एंगेल ने शी जिनपिंग सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देशों को समान नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने चीन से भारत के साथ सीमा संबंधी सवालों को हल करने के लिए मानदंडों का सम्मान करने और कूटनीति और मौजूदा तंत्र का उपयोग करने का आग्रह किया।

बातचीत में विन मिन्त ने कहा कि म्यांमार चीन द्वारा डब्ल्यूएचओ और म्यांमार समेत अन्य देशों के कोविड-19 के मुकाबले में दिये गये समर्थन व मदद की प्रशंसा करता है।

शी जिनपिंग ने स्थानीय निवासियों को शुभकामनाएं दीं कि सभी लोगों का जीवन सुखमय हो और शांतिपूर्ण हो। आशा है कि सभी लोग गरीबी से छुटकारा पा सकेंगे और खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकेंगे।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 19 मार्च की रात रूसी राष्ट्रपति वलादिमीर पुतिन के साथ फोन बातचीत की। इस मौके पर शी जिनपिंग ने कहा कि इस बार नोवल कोरोनावायरस निमोनिया का कहर आया है, और चीन को मुसीबतों का मुकाबला करना पड़ा है। क्योंकि यह न केवल चीनी जनता की जीवन सुरक्षा और शारीरिक स्वास्थ्य से संबंधित है, बल्कि विश्व की सार्वजनिक स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए भी अति महत्वपूर्ण है।

चीनी उप विदेश मंत्री मा चाओश्यू ने कहा कि चीन अनवरत विकास को अपनी मूल राष्ट्रीय नीति मानता है और पूरी तरह से 2030 अनवरत विकास कार्यसूची लागू कर रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक दोनों देश इस मीटिंग के बाद अलग-अलग बयान जारी करेंगे। हालांकि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात की वजह स्पष्ट नहीं है। कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात साल 2018 में चीन के वुहान शहर में हुई वार्ता की तरह अनौपचारिक ही रहेगी।

चीनी एंबेसडर ने कहा कि शुक्रवार-शनिवार को होने वाली नरेंद्र मोदी-शी जिनपिंग के बीच समिट से दोनों देशों के बीच की दोस्ती बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि चीन-भारत कभी भी एक दूसरे के लिए खतरा नहीं बन सकते हैं, दोनों का साथ चलना कई देशों के लिए सार्थक साबित हो सकता है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक के दौरान कश्मीर और संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के मुद्दों पर कोई बातचीत नहीं होगी, क्योंकि ये मुद्दे भारतीय संविधान और भारत की संप्रभुता से जुड़े हुए हैं।