रियल एस्‍टेट

रियल एस्टेट सेक्टर को आर्थिक पैकेज की घोषणाओं से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन उम्मीदें पूरी नहीं हुई। अब अपनी मांगों को लेकर बिल्डरों की संस्था क्रेडाई (CREDAI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ओपन लेटर लिखा है।

पार्श्वनाथ समूह ने सन् 1984 में रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रवेश किया था। प्रदीप जैन ने यह कंपनी निचले स्तर से शुरू की और इसे सिर्फ तीन दशकों में एक विशाल रूप दे दिया। यह उनके मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच की वजह से हुआ कि कंपनी ने भारत की तरक्की के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा और भविष्य में बहुत से ऐसे अध्याय जोड़ने की तैयारी है।

अगर को-ऐप्लिकेंट महिला हो तो ब्याज दर में ज्यादा छूट मिलती है। बैंक महिलाओं को पुरुष के मुकाबले ब्याज दर में 0.05 फीसदी की रियायत देता है। कई बार बैंक की यह कंडीशन होती है कि महिला को-ऐप्लिकेंट लोन में हिस्सेदार के साथ-साथ को-ओनर भी हो।

भले ही केंद्र सरकार ने आपके सपनों के घर को पूरा करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये के फंड के लिए मंजूरी दे दी हो लेकिन अभी तक अधूरे पड़े मकानों में काम तक शुरू नहीं किया गया है। वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ इस ढ़िलाई की वजह कुछ और ही बता रहे हैं।

स्टेट रेरा की वेबसाइट पर जाएं और Appellate Tribunal में जाकर online Appeals में जाएं। यहां आपसे लॉगइन और पासवर्ड जनरेट करने को कहा जाएगा।

इससे बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट आएंगे। कमर्शियल प्रोजेक्ट में बड़े व्यावसायिक निर्माण के साथ ही छोटे स्टार्टअप शुरू करने के लिए युवा निवेशकों को प्राइम एरिया में जगह मिल सकेगी।

कर छूट का लाभ लेने के बाद अगर पूरी रकम नहीं निवेश करते हैं तो आनुपातिक आधार पर बाकी रकम पर टैक्स लगेगा। एक मकान को बेच दूसरा खरीद कर टैक्स छूट लेने के बाद तीन साल के भीतर ही उसे दोबारा बेच देते हैं तो यह लाभ वापस हो जाता है।

पीठ ने कहा कि केवल वास्तविक घर खरीदार ही बिल्डर के खिलाफ दिवाला कार्यवाही का अनुरोध कर सकते हैं। पीठ ने केंद्र से कहा कि वह सुधारात्मक कदम उठाते हुए शपथपत्र दायर करें।

'इस वर्ष की शुरुआत में कुछ झटके लगने के बाद एनबीएफसी का बिजनेस पटरी पर लौटता दिख रहा था और जैंडर, केकेआर और टाटा कैपिटल जैसे फंड्स ने चुनिंदा बिल्डर्स को कैपिटल देनी शुरू की थी। हालांकि, यह लेंडिंग कड़े क्रेडिट नॉर्म्स पर आधारित था और फोकस विशेष प्रॉजेक्ट के बजाय कंपनी की वित्तीय ताकत पर था।

यह पार्टनरशिप भारत सरकार की मत्वाकांक्षीय योजना प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी लोगों को 2022 तक घर मुहैया कराने की दिशा में भी सहायक सिद्ध होगी। यह पार्टनरशिप तीन अलग-अलग स्तर के ग्राहकों के लिए फायदेमंद रहेगी।