रिसर्च

दुनियाभर में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच एक भारतीय वैज्ञानिक ने अच्छी खबर दी है। भारतीय वैज्ञानिक के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एक सस्ता, विद्युत रहित सेंट्रीफ्यूज विकसित किया है जो नए कोरोना वायरस की जांच के लिये किसी मरीज की लार के लिये गए नमूनों से घटकों को अलग कर सकता है।

ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca), ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर सितंबर माह तक 2 बिलियन कोरोना वैक्सीन का उत्पादन करने की योजना बना रही है।

कोरोना वायरस की शुरुआत के लिए जिम्मेदार चीन ने पैंगोलिन के संरक्षण के स्तर को बढ़ा दिया है। उसने इस प्राणी को प्रथम श्रेणी के संरक्षित जानवरों में शामिल कर दिया है। इस श्रेणी में पांडा जैसे उन जानवरों को रखा गया है, जो विलुप्त होने के कगार पर है।

दुनियाभर में महामारी कोरोनावायरस से जुड़ी कई तरह की रिसर्च चल रही हैं। वैज्ञानिक लगातार वैक्सीन की खोज में जुटे हुए हैं। इस बीच कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए एक अच्‍छी खबर सामने आई है।

डॉक्टरों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि कोरोना वायरस आंखों से भी फैल सकता है। हालांकि कानों के जरिये इसके फैलने की आशंका से इनकार कर दिया गया है।

कोरोना अब उतना घातक नही रह गया है। इटली के एक सायंटिस्ट ने दावा किया था कि ये ताजा म्यूटेशन के बाद हुआ है। अब कोरोना पहले जैसा खतरनाक नहीं रह गया है और इसकी मारक क्षमता में कमजोरी होती दिख रही है।

कोरोना वायरस वैक्‍सीन से जुड़ी एक अच्‍छी खबर आई है। अमेरिका में एक कंपनी का ट्रायल फेज टू में पहुंच गया है। चीन में एक वैक्‍सीन फेज टू पूरा कर चुकी है और अगले साल की शुरुआत तक मार्केट में उतारी जा सकती है।

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन खोजने की जो टीम बनाई गई है उसमें एक भारतीय मूल की वैज्ञानिक चंद्रबली दत्ता भी शामिल हैं। दत्ता कोलकाता में पैदा हुई थीं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रोटीन का इस्तेमाल एंटीवायरल ड्रग में बनाने में किया जाएगा। क्लीनिकल ट्रायल के बोझ को कम किया जा सकेगा। 

कैंसर एक खतरनाक बीमारी है। इसके बारे में महत्वपूर्ण और खतरनाक बात यह है कि इसका पता आमतौर पर काफी लेट चलता है और इस कारण इसके इलाज में कई कॉम्पलिकेशन्स आते हैं।