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ऐसा माना जाता है कि सफेद मांस की जगह रेड मीट का सेवन कोलेस्ट्रॉल के लिए ज्यादा खराब है, लेकिन ऐसा नहीं है कि ये दोनों कोलेस्ट्रॉल के लिए समान रूप से खराब हैं। शोधकर्ताओं ने यह जानकारी दी है। शोध में कहा गया है कि कोलेस्ट्रॉल स्तर कम करने के लिए रेड मीट और सफेद मीट का सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान तनाव महसूस करना काफी आम है, लेकिन बहुत अधिक तनाव से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि नींद न आना, लंबे समय तक सिरदर्द और भूख कम लगना आदि। अगर लंबे समय तक उच्च स्तर का तनाव जारी रहता है तो हृदय रोग और उच्च रक्तचाप हो सकता है। 

बाहर जाते समय अपने बालों को प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष स्प्रे का इस्तेमाल करें। त्वचा पर भी सनस्क्रीन, एलो वेरा जैल या अन्य रक्षात्मक परत लगाएं। इससे आपकी त्वचा 6-7 घंटों के लिए प्रदूषण से सुरक्षित हो जाती है।

एक आम आदमी के लिए इस बात का आकलन काफी कठिन होता है कि उसे क्या खाना है और कितना खाना है। ऐसे कई साधन हैं, जिनके माध्यम से कोई भी यह जान सकता है कि उसे कब, क्या और कितना खाना है।

इसके अलावा भी आप अपने भोजन में मूंग, अंकुरित चना, गेहूं और जौ की रोटियां शामिल करे और इन फलों को आम, अनार, अंजीर, अमरूद और संतरे को लेते रहे। ये फल आपके पेट को साफ़ रखेंगे जिससे आपका पाचन तन्त्र मजबूत बनेगा।

गर्भवती महिलाएं जो अखरोट जैसे फैटी एसिड युक्त आहार का सेवन करती हैं। उनके बच्चों को फूड एलर्जी होने की आशंका बहुत कम होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मांओं के आहार में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (पूफा) होता है। उनके बच्चे का विकास अच्छी तरह होता है।

यह लंबे समय तक रहने वाली और जानलेवा बीमारी है, जिसमें धूल और छोटे कणों के अंदर जाने से फेफड़े प्रभावित होते हैं।

हृदय रोग की रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना, नियमित व्यायाम करना, तंबाकू के किसी भी उत्पाद का सेवन नहीं करना, 7 घंटे की नींद लेना, तनाव को नियंत्रित करना, फलों का अधिक सेवन करना, शराब का सीमित मात्रा में सेवन करना सबसे महत्वपूर्ण हैं।

विभिन्न वजहों से होने वाले अस्थमा के भी कई प्रकार होते हैं जैसे एडल्ट ऑनसेट अस्थमा, एलर्जिक ऑक्यूपेशनल अस्थमा, व्यायाम से होने वाला अस्थमा और गंभीर (सीवियर) अस्थमा इत्यादि।