लैग्रेंजियन प्वॉइंट

नासा के वैज्ञानिकों को बताया गया कि किस तरह चंद्रयान-3 को डिजाइन किया गया है और चांद की सतह पर उसे किस तरह उतारा जाएगा। इस पर नासा के वैज्ञानिकों ने इतने सस्ते में चंद्रयान बनाने पर हैरत जताई और इसकी टेक्नोलॉजी अमेरिका को देने के लिए कहा। इससे पता चलता है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत कितना अहम है।

धरती और सूरज के बीच 5 लैंग्रेंजियन प्वॉइंट हैं। इनमें से पहले प्वॉइंट पर आदित्य एल-1 यान को इसरो स्थापित करेगा। लैंग्रेंजियन प्वॉइंट वो जगह हैं, जहां धरती और सूरज के गुरुत्वाकर्षण बल मिलते हैं। इस तरह आदित्य एल-1 यान वहां एक जगह स्थिर रहेगा और सूरज का अध्ययन करता रहेगा।

धरती के चारों तरफ आदित्य एल-1 को 16 दिन तक चक्कर लगाना है। इस दौरान इसरो के वैज्ञानिक उसका ऑर्बिट लगातार बढ़ाते रहेंगे। जिसके बाद आदित्य एल-1 को सूरज की तरफ भेजा जाएगा। आदित्य एल-1 यान को कुल 125 दिन की यात्रा के बाद 15 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंजियन प्वॉइंट 1 पर पहुंचना है।