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कांग्रेस द्वारा फंसे प्रवासियों की यात्रा की लागत को वहन करने की घोषणा और राहुल गांधी की नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी के साथ बातचीत के बाद यह बैठक बुलाई गई है।

ज्ञात हो कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को एक पत्र लिखकर दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने का किराया कांग्रेस की ओर से वहन किए जाने की बात कही है। सोनिया गांधी के पत्र पर शिवराज ने अपने ही तरह से प्रतिक्रिया दी है।

संबित पात्रा ने लिखा कि राज्य सरकारें टिकटों का पैसा दे सकती हैं, मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ऐसा कर भी रही है। आप कांग्रेस शासित प्रदेशों की सरकारों से ऐसा ही करने को कहें।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य वापस भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, मगर उनसे किराया लिया जा रहा है। सोनिया गांधी ने कहा विदेश में फंसे लोगों को मुफ्त में वापस लाया गया जबकि मजदूरों से किराया वसूला जा रहा है।

भारतीय रेलवे के मुताबिक, वह प्रवासी मजदूरों को उनके राज्य पहुंचाने के लिए मजदूरों को टिकट नहीं बेच रहा, ना ही उनसे किराया वसूल कर रहा है।बल्कि, यह किराया राज्य सरकारों से वसूला जा रहा है। भारतीय रेलवे राज्य सरकारों से इन मजदूरों को उनके गृह नगर तक पहुंचाने के लिए कुल लागत का सिर्फ 15 प्रतिशत मानक किराया वसूल रहा है।

हालांकि यह भी कहा गया है कि राज्य सरकारों द्वारा किये गए अनुरोध और गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों की आवाजाही के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलायी जायेंगी।

उन्होंने कहा कि इस समय छत्तीसगढ़ के बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए हैं। हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से प्राप्त सूचना के अनुसार लगभग 1.17 लाख से भी अधिक प्रवासी कामगारों के देश के 21 राज्यों और 4 केन्द्र शासित प्रदेशों में फंसे होने की जानकारी है।

उन्होंने पूछा कि 17 मई तक कोरोना संक्रमण व आर्थिक संकट से उबरने का लक्ष्य क्या है? मोदी सरकार ने 17 मई तक संक्रमण, रोजी-रोटी की समस्या व आर्थिक संकट से निपटने के लिए क्या लक्ष्य निर्धारित किए हैं? उन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 17 मई तक क्या सार्थक व निर्णायक कदम उठाए जाएंगे?

अजीज ने कहा कि अब वो बुरे दिन को याद नहीं करना चाहते। अब चाहे जो हो जाए वह राज्य से बाहर नहीं जाना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने गांव, घर, परिवार को छोड़कर नहीं जाना चाहता। यहां सरकार अगर रोजगार के साधन उपलब्ध करा दे, तो कोई क्यों जाए?

उन्होंने बताया कि जब पूछताछ की गई तो मजदूरों ने बताया कि वे इसमें सवार होकर महाराष्ट्र से लखनऊ जा रहे हैं। इन मजदूरों को क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया है, वहीं मिक्सर को जब्त कर सांवेर थाने में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।