विश्व में कोरोनावायरस

दुनियाभर में कोरोना के कहर के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक और चेतावनी जारी की है। जिसके मुताबिक जरूरी नहीं कि एक वैक्सीन से कोरोना खत्म हो जाए।

दुनियाभर में कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। विश्व में नोवल कोरोनोवायरस मामलों की कुल संख्या 1.72 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस घातक महामारी को लेकर नई चेतावनी दी है।

दुनियाभर में कोरोना के कहर के बीच वैज्ञानिकों ने 21 ऐसी प्रचलित दवाओं की पहचान की है जो प्रयोगशाला अध्ययनों में कोरोना वायरस के विकसित होने से रोकेंगी।

पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। लाखों लोग इस घातक वायरस से मर रहे हैं। इसे अब तक की सबसे बड़ी महामारी कहा जा रहा है। ऐसे में तमाम देशों के वैज्ञानिक और डॉक्टर इस महामारी की वैक्सीन की जद्दोजहद में लगे हैं। लेकिन इसी बीच WHO ने दुनिया को एक बड़ा झटका दिया है।

दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। ऐसे में दुनिया की एक प्रमुख वैज्ञानिक ने चेतावनी दी है कि चीन में इस तरह के माहौल में काम हो रहा है जिससे कोरोना से भी खतरनाक वायरस पैदा हो सकता है और इंसानों में फैल सकता है।

दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्‍सीन का वालंटियर्स पर ट्रायल पूरा हो गया है। इसी के साथ रूस ने कोरोना वैक्‍सीन पर बाजी मार ली है।

रूस की डिफेंस मिनिस्‍ट्री ने जो वैक्‍सीन बनाई है, वह ट्रायल के आखिरी दौर में पहुंच गई है। वैक्‍सीन जिन्‍हें दी गईं, उनमें कोरोना वायरस के प्रति इम्‍यूनिटी डेवलप होते देखी गई है।

कोरोना वायरस महामारी को लेकर एक नई स्टडी सामने आयी है। जिसमें पता चला है कि ये घातक वायरस शरीर में सिर्फ फेफड़ों पर ही असर नहीं करता बल्कि दिमाग पर भी बुरा असर डालता है।

वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस पर एक बड़ा शोध किया है। ये शोध हर्ड इम्यूनिटी के बारे में जानकारी जुटाने के लिए किया गया है। इस शोध के परिणाम हैरान करने वाले हैं। इसमें ये पता चलता है कि प्राकृतिक तौर से हर्ड इम्यूनिटी हासिल करना असंभव है।

दुनियाभर में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच एक भारतीय वैज्ञानिक ने अच्छी खबर दी है। भारतीय वैज्ञानिक के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एक सस्ता, विद्युत रहित सेंट्रीफ्यूज विकसित किया है जो नए कोरोना वायरस की जांच के लिये किसी मरीज की लार के लिये गए नमूनों से घटकों को अलग कर सकता है।