वैदिक समाज

सतत् कर्म का कोई विकल्प नहीं है। प्रकृति की सभी शक्तियां गतिशील हैं। हम पृथ्वी से हैं, पृथ्वी में हैं। पृथ्वी माता है। पृथ्वी सतत् गतिशील है। वह सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपनी धुरी पर नृत्य मगन रहती है। माता पृथ्वी के अंतस् में अपनी संतति को सुखी बनाए रखने की अभिलाषा है। इसलिए वह कोई अवकाश नहीं लेती।