सचिन पायलट

ज्योतिरादित्य और सचिन ने बहुत साल साथ काम किया है। दोनों एक ही पीढ़ी के नेता हैं। दोनों वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के परिवार से आते हैं। निश्चित ही दोनों में दोस्ती और आत्मीय संबंध होंगे, लेकिन आगे क्या होगा, इसके लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए, क्योंकि इंतजार का फल हमेशा मीठा होता है।

जिस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया के संबंध लगातार बिगड़ रहे थे ठीक वैसे ही संबंध सचिन पायलट का भी राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ देखने को मिलता रहता है।

सूत्रों के मुताबिक सचिन पायलट खुद सिंधिया के स्टैंड से सहानुभूति रखते हैं। उनका मानना है कि सिंधिया के साथ मध्य प्रदेश में वहीं अन्याय हुआ है जो उनके साथ राजस्थान में हुआ है। सिंधिया के इस्तीफे के बाद बीजेपी की ओर से उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार भी बना दिया गया।

इससे पहले गहलोत ने प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सचिन पायलट पर निशाना साधा था। सचिन पायलट ने कोटा जाकर शिशुओं के परिवारों से मुलाकात की थी।

ये भी देखा गया है कि गहलोत सरकार ने कोटा के जे के लोन अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले को जिस तरीके हैंडल किया है उसको लेकर उसकी भारी भरकम आलोचना हुई है।

सचिन पायलट ने कहा नवम्बर में होने वाले मतदान में कांग्रेस पार्टी को मिलेगा प्रचंड बहुमत

राजस्थान सरकार के नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव के लिए एक हाइब्रिड मॉडल को लागू करने के फैसले पर राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस बंटी हुई नजर आ रही है।

राजस्‍थान विधानसभा सत्र के दौरान राजस्‍थान कांग्रेस के अध्‍यक्ष सचिन पायलट अकेले ऐसे कांग्रेस विधायक थे जो सदन के अंदर मौजूद थे।

सचिन पायलट कह रहे हैं कि जनता ने अशोक गहलोत के नाम पर वोट नहीं दिया और ऐसा ही आरोप अशोक गहलोत भी सचिन पायलट पर लगा रहे हैं।