सपा नेता

अब्दुल्ला आजम के निर्वाचन के खिलाफ तत्कालीन बसपा नेता नवाब काजिम अली ने याचिका दायर की थी। नवाब अब कांग्रेस में हैं। अली ने अपनी याचिका में कहा था, “साल 2017 में चुनाव के समय अब्दुल्ला की आयु 25 साल से कम थी, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने फर्जी दस्तावेज पेश किए।”

सपा नेता और संभल लोकसभा से चुनकर आए प्रत्याशी डॉ शफिकुर्रहमान बर्क ने लोकसभा में यह बयान दिया जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। उन्होंने अपने शपथ के अंत में कहा कि जहां तक वंदे मातरम् का तालुक्क है वह इस्लाम के खिलाफ है इसलिए मैं इसे नहीं मान सकता। हालांकि उन्होनें भारतीय संविधान की सराहना की ।