सपा-बसपा गठबंधन

मायावती की तानाशाही और भाई-भतीजावाद से नाराज़ ये धड़ा भी पाला बदलकर बीजेपी में जा सकता है। इस तरह बीजेपी जल्द ही बहुमत के करीब पहुंच सकती है।

चुनाव खत्म होते ही बसपा ने सपा से अलग होने का फैसला कर लिया है। बसपा का आरोप है कि सपा के परंपरागत वोट बसपा के उम्मीदवार को ट्रांसफर नहीं हुए। हालांकि कि ये अलग बात है कि बसपा ने सपा का सहारा लेकर अपनी झोली में 10 सीट डाल ली।

यह साफ है कि समाजवादी पार्टी ने इन सीटों पर बसपा को अपने वोट स्थानांतरित किए हैं, लेकिन बसपा का वोट सपा के उम्मीदवारों को स्थानांतरित नहीं हुआ। गठबंधन की ओर एक बड़ी दुर्घटना राष्ट्रीय लोकदल रही है।

शनिवार देर रात को सुल्तानपुर में केंद्रीय मंत्री व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रत्याशी मेनका गांधी के समर्थकों के साथ मारपीट की सूचना मिली है।

सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के उस बयान पर पलटवार किया है जिसमें प्रियंका गांधी ने कहा था कि यूपी की कुछ सीटों पर कांग्रेस ने कमजोर उम्मीदवार उतारे हैं जो भाजपा के वोट काटेंगे और सपा-बसपा गठबंधन को फायदा पहुंचाएंगे।

लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच हुए गठबंधन के तहत 25 साल बाद पहली बार दोनों दलों की संयुक्त जनसभा रविवार को होने जा रही है।

कभी अपने अपमान को लेकर मुलायम सिंह यादव से दूरी बनाने वाली मायावती मैनपुरी में मुलामय सिंह यादव के साथ मंच साझा करेंगी। इस रैली पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं क्योंकि पच्चीस सालों से दोनों को एक दूसरे की शक्ल तक देखना पसंद नहीं रहा।

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार कर ली हैं। वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सपा-बसपा गठबंधन और गांधी परिवार की अहम सदस्य प्रियंका गांधी की सियासत में आने से आने वाली चुनौतियों का सामने करने के लिए बड़ी रणनीति तैयार कर ली है।

नई दिल्ली। आज बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती का 63वां जन्मदिन है। मायावती के जन्मदिन के मौके पर लोगों...

नई दिल्ली। यूपी में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा गठबंधन भले ही चुका है लेकिन ये...