सभ्यता

अथर्ववेद में जीवन के सभी पक्ष हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद में वैज्ञानिक विषयों का भी दर्शन है। सामवेद गीत प्रधान है लेकिन अथर्ववेद में उपलब्ध विज्ञान की व्यवहार पद्धति भी है।

प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और इसमें चावल, लाल फूल, लाल चंदन भी डालें। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाएं। इस दौरान सूर्य मंत्र ‘ऊँ सूर्याय नम:’ का जाप करें।

मंगल और राहु की शांति के लिए निर्दिष्ट दान के साथ वैदिक मंत्रों के जप ओर दशांश मंत्रों हवन करना लाभकारी होता है। अंगारेश्वर महादेव, उज्जैन पर अधिक प्रभाव मिलेगा।

भारत की देव आस्था निराली हैं, यहां प्रत्येक ग्राम के देवता हैं, कुल देवता हैं, क्षेत्र देवता हैं और वन देवता भी हैं। वैदिक काल के देवता वेदों में हैं। उत्तरवैदिक काल व पुराण काल में भी वैदिक देवों की उपासना व स्तुतियां थीं लेकिन तमाम नए देवनाम भी जुड़े। तैत्तिरीय उपनिषद् में ‘आचार्य देवता है - आचार्य देवो भव। माता पिता भी देवता है - मातृ देवो भव, पितृ देवो भव।

जब मंगलवार को अमावस्या हो तब खगर्ता संगम पर देवता पूजित हैं..उस दिन यहाँ दर्शन और पूजा-स्नान से वाराणसी,प्रयाग, गयाजी और करुक्षेत्र में एवं पुष्कर में स्नान-पूजन का जो पुण्य मिलता हैं उससे भी अधिक पुण्य फल यहाँ पूजन और दर्शन से प्राप्त होगा..

अब पूजन में शामिल सभी लोगों को तिलक लगाकर अक्षत लगाएं और दाएं हाथ में मौली बांधें। महिलाऐं खुद के हाथ से चूड़ी पर या माथे पर रोली से बिंदी लगाएं। महिलाओं के बाएं हाथ में मौली बांधें।

श्राद्ध सामान्य अंधविश्वासी कर्मकाण्ड नहीं है। हमारे पूर्वजों ने ही ऐसे सुंदर कर्मकाण्ड को बड़े जतन के साथ गढ़ा है। इस कर्मकाण्ड में स्वयं के भीतर पूर्वजों के प्रवाह का पुनर्सृजन संभव है।