समाज

मनुष्य एकाकी नहीं रह सकता। वह परिवार और समाज का अंग है। परिवार में परस्पर प्रेम का प्रसाद होता है। इसी तरह समाज में परस्पर प्रेम से राष्ट्र आनंद क्षेत्र बनते हैं।

अथर्ववेद में जीवन के सभी पक्ष हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद में वैज्ञानिक विषयों का भी दर्शन है। सामवेद गीत प्रधान है लेकिन अथर्ववेद में उपलब्ध विज्ञान की व्यवहार पद्धति भी है।

इस थीम के तहत समाज में विकलांगों को बराबरी के अवसर, उनके अधिकारों के बारे में लोगों को जागरुक करने और सामान्य नागरिकों की तरह उनकी सेहत पर भी ध्यान देने के साथ सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारने आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

धनतेरस के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार किसी भी रूप में चांदी एवं अन्य धातु खरीदना अति शुभ माना जाता है।

किसी दूसरे व्यक्ति के घर या जमीन पर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। हालांकि जंगल, पहाड़, मंदिर या पुण्यतीर्थ किसी दूसरे की जमीन के तौर पर नहीं देखे जाते हैं क्योंकि इन जगहों पर किसी का अधिकार नहीं होता है। इसलिए यहां श्राद्ध किया जा सकता है।