सरस्वती पूजा

बसंत पंचमी का दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान है। सरस्वती मां को ज्ञान, कला और संगीत की देवी कहा जाता है।

वसंत को ऋतुओं यानी मौसमों का राजा कहा जाता है। इसे प्यार का मौसम भी कहते हैं, क्योंकि धरती इस मौसम में खूबसूरत फूलों का श्रंगार करती है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में कई उत्सव मनाने का भी रिवाज है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है और बच्चों की पढ़ाई का आरंभ भी किया जाता है।

सर्दी के महीनों के अंत होने के साथ ही और बसंत और फसल की शुरूआत होने के रूप में बसंत पचंमी का त्योहार मनाया जाता है। इस साल बसंत पचंमी का त्योहार 10 फरवरी को मनाया जाएगा।

सभी ऋतुओं में बसंत ऋतु को राजा माना जाता है। माघ शुक्ल पक्ष की पचंमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना करने से विद्या, धन, वैभव सभी कुछ पाया जा सकता है।

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा के दिन के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति ने मनुष्य के जीवन में प्रवेश किया था।

केरल में कोच्चि की एक यूनिवर्सिटी ने उत्तर भारतीय छात्रों को कैंपस में सरस्वती पूजा की अनुमति नहीं दी है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि हमारा कैंपस धर्मनिरपेक्ष है और हम अपने परिसर में ऐसी किसी भी धार्मिक गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जा सकती है।