सुप्रीम कोर्ट फैसला

भाजपा के वयोवृद्ध नेता मुरली मनोहर जोशी ने शनिवार को अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और इसे न सिर्फ हिंदुओं की, बल्कि प्रत्येक भारतीय की जीत बताया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को यहां कहा कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने देश और दुनिया में भारत की संवैधानिक व्यवस्था और लोकतंत्र की मजबूती को फिर से साबित कर दिया है।

इस फैसले पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी बातें रखते हुए कहा कि, मैं अपने सभी देशवासियों के साथ ही आज अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले का तहे दिल से स्वागत करता हूं।

अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला आ गया है और सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए रामलला के हक में विवादित जमीन को दिया है। इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ की जमीन अयोध्या में किसी और जगह पर दी जाएगा।

अयोध्या मामले में शनिवार को फैसला सुनाने वाली पीठ के सभी सदस्य आज रात राष्ट्रीय राजधानी स्थित होटल ताज मानसिंह में डिनर (रात्रिभोज) करेंगे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जितनी भी सुनवाई राम मंदिर को लेकर हुई उस पूरी सुनवाई के दौरान अदालत में एक शख्स हमेशा मौजूद रहे वह हैं 'विश्व हिंदू परिषद' के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय।

औवेसी ने कहा कि कांग्रेस ने अपना असली रंग दिखाया है। यदि 1949 में कांग्रेस ने दरवाजे नहीं खोले होते तो वहां मूर्तियां नहीं रखी जातीं और राजीव गांधी ने ताला नहीं खुलवाया होता तो मस्जिद आज वहीं होती।

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर रामलला का दावा मान्य है। इस जमीन पर मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करने के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया गया है। केंद्र सरकार ही ट्रस्ट के सदस्यों का नाम निर्धारित करेगी।

यानी कोर्ट का फैसला राम मंदिर के पक्ष में गया है और अब केंद्र सरकार को आगे की रूपरेखा तय करनी है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि रामलला न्यायिक संपत्ति है ना कि राम जन्मभूमि।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने यह फैसला सर्वसम्मति से दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि अयोध्या में बुनियादी ढांचा इस्लामी नहीं था।