सृजनशक्ति

काम कामनाओं का बीज है। यह प्रकृति में सर्वव्यापी है। प्राकृतिक है। प्रकृति की सृजनशक्ति है। प्रत्येक शक्ति का नियमन भी होता है। नियमविहीन शक्ति अराजकता में प्रकट होती है। फिर काम को विराट शक्ति जाना गया है।

प्रत्येक प्राणी की काया के अणु परमाणु में काम सर्जक तरंग हैं। मन संकल्प का केन्द्र भी काम ऊर्जा के प्रवाह से शक्ति पाता है।। प्रकृति में अतिरिक्त काम ऊर्जा है। यह काम ऊर्जा के तरंग प्रवाह से उफनाती रहती है।