स्वास्थ्य

जो महिलाएं औसत शराब पीती थी या शराब पीना छोड़ देती थी, उनमें मानसिक तौर पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। फिलहाल यह अध्ययन चीन व अमेरिका के नागरिकों पर हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शोध भारतीय नागरिकों पर भी किया जा सकता है।

 कई लोगों को बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद नहीं आती है और वो देर तक करवट ही बदलते रह जाते हैं। ऐसे में बेहतर है कि जब आपके साथ ऐसा हो तब आप कोई किताब पढ़ें। इसके थोड़ी देर बाद ही आप नींद के आगोश में चले जाएंगे।

पुरोहित का कहना है कि लोग अब फिटनेस को केवल आप कैसे दिखते हैं इसके आधार पर ही नहीं देखते, बल्कि इससे भी जोड़कर देखते हैं कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं। लोग अब फिटनेस को शक्ति, संतुलन और स्थिरता से जोड़कर देखते हैं।

पास्चुरीकृत बैक्टीरिया ने प्रतिभागियों में डायबिटीज 2 और दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर दिया।इससे लिवर के स्वास्थ्य में भी सुधार देखा गया, प्रतिभागियों के शारीरिक वजन में भी गिरावट (सामान्यतौर पर 2.3 किलो) देखी गई और इनके साथ ही साथ कोलेस्ट्रोल के स्तर में भी कमी आई।

टीएचएस का परिणाम धूम्रपान में श्वास छोड़ने व सिगरेट के जलने से निकलने वाले धुएं के सतह जैसे कपड़े, बाल व फर्नीचर पर गिरने की वजह से होता है।

जो लोग हर रात सात घंटे से कम सोते हैं, वे अपने दिल को बीमार करने का खतरा मोल ले रहे हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जो लोग सात घंटे से कम की नींद लेते हैं, उनमें दिल की बीमारी (सीवीडी) और कोरोनरी हृदय रोग विकसित होने का खतरा ज्यादा रहता है।

रत्नम अपनी अगली फिल्म पर काम शुरू करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आखिरी बार जुलाई 2018 में अपनी वार्षिक स्वास्थ्य जांच करवाई थी। 2004 में 'युवा' के सेट पर मणिरत्नम को दिल से संबंधित स्वास्थ्य परेशानियां सामने आई थीं। वह तब से चिकित्सकों की देखरेख में हैं।

ऐसे दिनचर्या को अपनाकर आप खुद को बीमारियों से सुरक्षित रख सकते है। जरूरत है समय रहते खुद को जागरूक करने की ताकि आप एक स्वस्थ्य जीवनशैली को अपना सकें। तो इस गर्मी एनर्जी ड्रिंक को कहें गुडबॉय और देशी ड्रिंक जैसे कि लस्सी, छाछ, नारियल पानी इत्यादि को अपने रूटीन में शामिल कर खुद को तरोताजा रखें।

शोधकर्ताओं ने भूकंप के बाद दो साल तक जीवित रहने वालों का सर्वेक्षण किया और पाया कि 94 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अनिद्रा के लक्षणों और आपदा के बाद के जोखिम का अनुभव किया।

एक नए अध्ययन में संकेत मिला है कि जो कर्मचारी कार्यस्थल पर अस्वास्थ्यकर भोजन खाते हैं, ऐसे लोगों में डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा अधिक होता है। चिकित्सक की सलाह है कि कार्यस्थल पर जंक फूड की जगह फास्ट फूड को तरजीह दें।