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दिवाली की रात पीपल के नीचे तेल का दीपक ज़रूर जलाएं। यदि पीपल ना हो तो किसी चौराहे पर दीपक जला कर पीछे पलट कर मत देखें और चुपचाप अपने घर को लौट आएं।

मां भगवती सिद्धीदात्री को हर रोज भगवती का ध्यान करते हुए पीले पुष्प अर्पित करें। मोती चूर के लड्डूओं का भोग लगाएं ओर श्री विग्रह के सामने घी का दीपक जलाएं।

मृत्यु जितना शाश्वत सच है, शास्त्र और पुराण भी उतना ही सत्य है। हम यही संस्कार अपनी पीढ़ी को स्थानांतरित कर रहे हैं।

जब मृत व्यक्ति के अधूरे कार्य पूरे नहीं किए जाते तो उसकी आत्मा परिवार पर अप्रत्यक्ष रुप से कार्यों को पूरा करने के लिए दबाब डालती है। जिसके कारण परिवार में कई बार अशुभ घटनाएं घटित होती हैं। यही पितृदोष होता है।

यदि उक्त विधि को करना किसी के लिए संभव न हो, तब वह जल को पात्र में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके तर्पण कर सकता है।

हाथी का कान सूप जैसा मोटा होता है। गणेश जी को बुद्धि का अनुष्ठाता देव माना गया है।  मनुष्य के अंदर लोभ को अंत करने के लिए गणेश जी के इस रूप की पूजा विशेष फलदायी होती है। कर्क राशि के व्यक्तियों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।

माता पिता के प्रति भावपरक ऋद्धा का अपना समाज विज्ञान है। माता पिता बचपन में पोषण देते हैं, पढ़ाते हैं सिखाते हैं। वे स्वयं की चिन्ता नहीं करते अपना भविष्य नहीं देखते। हम सबके सुखद भविष्य का तानाबाना बुनते हैं।  हम तरूण होते हैं, पिता वृद्ध होते हैं। हम तरूणाई से और परिपक्व होते हैं, पिता और वृद्ध होते हैं। जब हम तेज रफ्तार जीवन की गतिशीलता में होते हैं, तब माता पिता उठते हीं गिर पड़ते हैं। वे बचपन में हमको गिरने से बचाते थे।

किसी दूसरे व्यक्ति के घर या जमीन पर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। हालांकि जंगल, पहाड़, मंदिर या पुण्यतीर्थ किसी दूसरे की जमीन के तौर पर नहीं देखे जाते हैं क्योंकि इन जगहों पर किसी का अधिकार नहीं होता है। इसलिए यहां श्राद्ध किया जा सकता है।

हर घर की एक कुलदेवी होती हैं। आज भारत में 70% परिवार अपने कुलदेवी को नहीं जानते। कुछ परिवार बहुत पीढ़ियों से कुलदेवी का नाम तक नहीं जानते।

नई दिल्ली। विज्ञान और दर्शन सार्वभौम होते हैं। उनकी मान्यताएं भौगोलिक क्षेत्र के बन्धन में नहीं होतीं। भारत में तर्क,...