​​Sharjeel Imam

1969 में जेएनयू (JNU) की स्थापना कांग्रेस (Congress) और वामपंथ (leftist) के दुरभिसंधि काल में हुई थी। दोनों के बीच परस्पर अलगाव, अविश्वास, षड्यंत्र और संघर्ष का दौर समाप्त हो चुका था। कांग्रेस और वामपंथ में एक अघोषित और अलिखित परस्पर फायदे का समझौता हो चुका था। यह तय हुआ था कि केन्द्रीय सत्ता और राजनीति कांग्रेस के हाथ में होगी और कला, संस्कृति और बौद्धिक संस्थाओं से जुड़े सत्ता के केन्द्रों के सुविधाभोगी नियंता वामपंथी होंगे। सांस्कृतिक केंद्र वामपंथ की पाठशाला, कार्यशाला और प्रयोगशाला बन गए।

Umar Khalid Confession: अपने बयान में उमर(Umar Khalid) ने कहा कि, 'प्लान कामयाब ना होता देख हमने आंदोलन को और सख्त बनाने की योजना बनाई। हमने 16 और 17 फरवरी की शाम एक मीटिंग में तय किया कि अब हिंसा(Violence) का रास्ता अपनाकर ही सरकार को घुटनों पर लाया जा सकता है।

Farmers Protest: कृषि कानूनों (Agricultural laws) के खिलाफ देश में किसानों का विरोध प्रदर्शन (Farmer Protest) आज 16वें दिन भी जारी है। किसान अभी भी अपनी मांगों पर डटे हुए हैं। लेकिन अब कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में हो रहा किसानों का प्रदर्शन सवालों के घेरे में घिरता जा रहा है।

Farmer Protest: पोस्टर्स में जिन लोगों को रिहा करने की बात कही गई है, उनमें यूएपीए(UAPA) के तहत गिरफ्तार हुए शरजील इमाम का भी जिक्र है। बता दें कि शरजील इमाम(Sharjeel Imam) ने असम को भारत से काटने की बात की थी।

Delhi Riots: दिल्ली पुलिस(Delhi Police) की अर्जी का विरोध करते हुए उमर खालिद(Umar Khalid) के वकील ने कहा कि उमर खालिद ने पुलिस की जांच में पूरी तरह से सहयोग किया है। ऐसे में उमर खालिद पर यह आरोप लगाना कि उसने जांच में सहयोग नहीं कर रहा है, गलत है।

पुलिस उपायुक्त (अपराध) राजेश देव ने कहा कि चार्जशीट पटियाला हाउस कोर्ट में दायर की गई। अदालत अब 27 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करेगी।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा था कि उसे शरजील इमाम के खिलाफ जांच के लिए और समय की जरूरत है।

याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत अदालत ने मामले में चार्जशीट दाखिल करने के लिए दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को और समय दिया था। पिछले हफ्ते, दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शरजील इमाम द्वारा भड़काऊ भाषण दिए जाने के मामले में दायर जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

दिल्ली हिंसा की जांच कर रही क्राइम ब्रांच को अपनी जांच में एक और सफलता मिली है। जिसमें पता चला है कि जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम ने जानबूझ कर दिल्ली समेत देश भर में दंगे कराने के मकसद से भड़काऊ भाषण दिए थे।

गौरतलब है कि शरजील पर जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में राजद्रोह का मामला दर्ज किए गया था जिसके बाद से वो फरार हो गया था लेकिन दिल्ली पुलिस ने 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद से उसे गिरफ्तार किया था।