Allahabad High court

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि याचिका में उठाए गए बिंदु सिर्फ कल्पनाओं के सहारे है और जो आशंकाएं जताई गई हैं, वे आधारहीन हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मंदिर निर्माण ट्रस्ट और यूपी सरकार को भूमि पूजन कार्यक्रम में कोविड गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश दिया है।

इस याचिका में कहा गया है कि अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान तीन सौ लोग इकट्ठा होंगे जो कि कोविड के नियमों के खिलाफ होगा।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा के टिकट पर 23 जनवरी, 2015 को विधान परिषद के सदस्य बने थे। वह 22 फरवरी, 2018 को बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे, जिसके बाद बसपा ने नसीमुद्दीन की सदस्यता समाप्त करने के लिए विधान परिषद के चेयरमैन के समक्ष अर्जी दी, जिस पर मंगलवार को फैसला लिया गया।

राज्य के मुख्य सचिव को आदेश जारी करते हुए अदालत ने उन्हें इस संबंध में एक परिपत्र जारी करने को कहा है। इस बीच, राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल द्वारा अदालत में पेश किए गए हलफनामे के अनुसार राज्य के क्वारंटाइन केंद्रों में 3,001 भारतीय और 325 विदेशी तब्लीगी जमात सदस्य हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अजान को लेकर एक बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अजान इस्लाम का अहम हिस्सा है। लेकिन इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एक और बात कही है।

कोर्ट ने कहा है कि दो सप्ताह तक कोई भी नीलामी प्रक्रिया नहीं होगी। किसी के भी मकान का ध्वस्तीकरण नहीं होगा। किसी को भी उसके मकान से बेदखल नहीं किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीएए विरोधी प्रदर्शकारियों के लगाए गए वसूली के पोस्टर पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है।

ज्ञात हो कि सीएए के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन करने वालों के फोटो सहित पोस्टर, बैनर लगाने को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गलत माना है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार लोगों की निजता व जीवन की स्वतंत्रता के मूल अधिकारों पर अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

अदालत ने कहा, "बिना कानूनी उपबंध के नुकसान वसूली के लिए पोस्टर में फोटो लगाना अवैध है। यह निजता के अधिकार का हनन है। बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी की फोटो सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना गलत है।"

बता दें कि लखनऊ में दिसंबर में नागिरकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान उपद्रवियों ने लखनऊ में सरकारी संस्थाओं को नुकसान पहुंचाया था। जिला प्रशासन ने सीएए विरोधी उपद्रवियों की पहचाने के लिए शहर में पोस्टर लगाए हैं।