Article 370

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के एक साल बाद भी काफी बेचैन और बौखलाए हुए हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर पीएम मोदी के लिए बहकी बहकी बातें की।

पंचायतें, विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं के लिए पात्र लाभार्थियों के चयन में शामिल होने के अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, समग्र शिक्षा जैसी प्रमुख राष्ट्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए प्रति वर्ष 50 लाख-80 लाख रुपये प्राप्त कर सकती हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्‍त 2019 को जम्‍मू कश्‍मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधान खत्म किए थे। इस दौरान सरकार ने वहां के तमाम नेताओं को हिरासत में ले लिया था। उस समय जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, फारूख अब्दुल्ला और कई अन्य राजनेता भी हिरासत में लिया गया था।

लोन मुख्य धारा के उन 50 नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें पिछले साल पांच अगस्त को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त करने के समय गिरफ्तार किया गया था।

जम्मू-कश्मीर की नयी अधिवासन नीति वस्तुतः जम्मू-कश्मीर के नव-निर्माण का दस्तावेज है। यह नीति जम्मू-कश्मीर की महत्वाकांक्षी निर्माण परियोजना में अपना श्रम, कौशल, प्रतिभा और पूँजी लगाने वाले भारतीयों का स्वागत-द्वार है।

अनुच्छेद 370 के हटने के बाद बिहार के रहने वाले आईएएस अफसर जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी बने हैं। आईएएस अफसर नवीन चौधरी वर्तमान में जम्मू शहर में रहते हैं। वो दूसरे राज्य से आने वाले ऐसे पहले नौकरशाह हैं, जिन्हें राज्य का स्थायी निवासी बनाया गया है।

यूएनएचआरसी के 43वें सत्र में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का मुद्दा उठाने पर राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव सेंथिल कुमार ने इस्लामाबाद को राइट्स फोरम का दुरुपयोग करने पर लताड़ा।

नरेंद्र मोदी 2.0 के गठन के बाद से गरीब, महिला, किसान, युवा, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधा फायदा पहुंचाया जा रहा हैं।

कोरोना के इस संकट काल के बीच भी कराए गए सर्वे की मानें तो पीएम नरेंद्र मोदी के ऊपर 71 प्रतिशत से ज्यादा देश की जनता का भरोसा कायम है।

घाटी में पांच अगस्त को अनुछेद 370 हटाने से पहले यहां करीब 50 से अधिक बड़े राजनेताओं को हिरासत में लिया गया था, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल थीं।