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ज्योतिष अनुसार ग्रहों की चाल बदलती रहती है। ये एक राशि से निकलकर दूसरी, तीसरी, चौथी, आदि द्वादश राशियों में भ्रमण करते रहते हैं। इन्हीं के अनुसार ये अपना फल प्रदान करते हैं।

24 जनवरी 2020 को सायंकाल शनि अपना राशि परिवर्तन कर रहे है। अब शनिदेव धनु से मकर राशि मे प्रवेश कर रहे है। शनि एक राशि मे ढाई साल रहते है और जब विपरीत फल देते है तो लोग त्राहिमाम करने लगते है।

यदि जन्मकुंडली मांगलीक होगी तो विवाह होकर भी तलाक हो जाता है। किन्तु ध्यान रहे किसी भी हालत में सप्तमेश को वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए।

उतारे की वस्तु सीधे हाथ में लेकर नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर की ओर सात अथवा ग्यारह बार घुमाई जाती है। इससे वह बुरी आत्मा उस वस्तु में आ जाती है।

यदि जीवन रेखा, हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा तीनों प्रारंभ में मिली हुई हो तो व्यक्ति भाग्यहीन, दुर्बल और परेशानियों से घिरा होता है।

कुर्मा पुराण के अनुसार कुंभ उत्सव में स्नान करने से सभी पापों का विनाश होता है, और मनोवांछित फल प्राप्त होता है। यहां स्नान से देव लोक भी प्राप्त होता है। भविष्य पुराण के अनुसार कुंभ स्नान से पुण्य स्व स्वरुप मिलता है, और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और इसमें चावल, लाल फूल, लाल चंदन भी डालें। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाएं। इस दौरान सूर्य मंत्र ‘ऊँ सूर्याय नम:’ का जाप करें।

जन्मकुंडली में रोग उत्पन करने वाले ग्रहो के निदान के लिए पूजा, पाठ, मंत्र जप, हवन( यज्ञ ), यंत्र , विभिन्न प्रकार के दान एवं रत्न आदि साधन ज्योतिष शास्त्र में उल्लेखित है।

वर्ष की शुरुआत में 24 जनवरी को शनि का परिवर्तन हो रहा है जो कि आपकी राशि से सुख भाव के मालिक होकर पराक्रम में स्वराशिगत गोचर कर रहे हैं। यह आपके पराक्रम की उन्नति के लिये इसमें वृद्धि के योग बनाते हैं। परन्तु यह स्थान छोटे भाई का स्थान भी है इसलिये छोटे भाई-बहनों के भविष्य को लेकर भी आप चिंतित रह सकते हैं।

मंगल और राहु की शांति के लिए निर्दिष्ट दान के साथ वैदिक मंत्रों के जप ओर दशांश मंत्रों हवन करना लाभकारी होता है। अंगारेश्वर महादेव, उज्जैन पर अधिक प्रभाव मिलेगा।