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साधारण मनुष्य नियति या प्रारब्ध अटल होने के बावजूद ज्योतिष के साधारण उपायों से अपने कष्टों कों दूर कर घर में सुख-समृद्धि ला सकता है। यह पूरी तरह निश्चित है कि साधारण उपायों से जीवन में सुख शांति एवं समृद्धि लाई जा सकती है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के मुहूर्त को लेकर सवाल उठाए है।

ज्योतिषियों के अनुसार यदि निर्धारित समय राम मंदिर का भूमि पूजन सकुशल संपन्न हो गया तो अयोध्या विश्व पटल पर छा जाएगी। आप भी जानिए आखिर राम मंदिर निर्माण की तारीख 5 अगस्त 2020 को ही क्यों चुना गया ??

गुरुवार के दिन से सूर्य, कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। जैसे ही सूर्य का कर्क में गोचर हुआ, तभी से सम-सप्‍तम योग लग गया। इस योग के होने का अर्थ है कि सूर्य कर्क में और शनि मकर राशि में होंगे।

यह ग्रहण इस वर्ष के सबसे बड़े दिन अर्थात 21 जून को लगने जा रहा हैं जो लगभग 65 वर्ष इसी दिन घटित होगा। इससे पूर्व 1955 में भी 21 जून को ही सूर्य ग्रहण हुआ था। 21 जून को उत्तरी गौलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन होता हैं। पृथ्वी के 66.5 अंश झुके हुए होने तथा इसी स्थिति में सूर्य की परिक्रमा करने के कारण ही पृथ्वी पर दिन रात की अवधि में असमानता पाई जाती हैं।

भारतीय वैदिक ज्योतिष में कुंडली मिलान के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि में मिलाए जाने वाले अष्टकूटों में नाड़ी और भकूट को सबसे अधिक गुण प्रदान किए जाते हैं। नाड़ी को 8 तथा भकूट को 7 गुण प्रदान किए जाते हैं। इस तरह अष्टकूटों के इस मिलान में प्रदान किए जाने वाले 36 गुणों में से 15 गुण केवल इन दो कूटों अर्थात नाड़ी और भकूट के हिस्से में ही आ जाते हैं। इसी से गुण मिलान की विधि में इन दोनों के महत्व का पता चल जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण के इन विभिन्न मंत्रों के जाप से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शुभता बढ़ाने व सुख प्रदान करने में ये मंत्र अत्यन्त प्रभावी माने जाते हैं। मंत्रों के लाभकारी प्रभावों का विवरण भी दिया जा रहा है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य, रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तबसे नौतपा प्रारंभ होता है। नौतपा के इन नौ दिन तक सूर्य से तीव्र ऊर्जा निकलती है, जिससे गर्मी का प्रकोप बढ़ता है। इस बार 24 मई की रात्रि 2 बजकर 32 मिनट पर सूर्य जो है वह रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। नौतपा की शुरुआत भले ही 24 मई 2020 की रात से हो जाएगी, लेकिन सूर्य की तपन का प्रभाव 25 मई 2020 से माना जाएगा।

ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'अपरा एकादशी' कहा जाता है। इसका व्रत रखने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस बार यह एकादशी आज 18 मई 2020 को मनाई जा रही है। पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से कई पापों का नाश होता है। इसका व्रत सुहागिनों के लिए सौभाग्य लेकर आता है। 

किसी जातक के जीवन के बारे मे जानकारी प्राप्त करने हेतु ज्योतिष शास्त्र मे जन्म कुंडली का अध्ययन कर बताया जा सकता है कि जातक का सम्पूर्ण जीवन कैसा रहेगा।