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ज्योतिष शास्त्र ग्रहों के चलन, उनके समागम या वियोग से सामान्य जन जीवन, पृथ्वी व मनुष्य जाति पर होने वाले शुभाशुभ प्रभावों का निर्धारण तथा उससे होने वाले परिवर्तनों (सुख-दुख) का ज्ञान कराता है।

वैदिक ज्योतिष में यदि सबसे कम चर्चा किन्ही ग्रहों की होती है तो वो हैं बुध व केतु। इनपर सबसे कम लिखा गया है,सबसे कम ध्यान दिया जाता है , सबसे कम इन्हीं से डरा जाता है।

इस समय बच्चों की परीक्षाएं चलने वाली हैं आइये जानते हैं ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री से विद्यार्थियों हेतु कुछ विशेष उपाय जो सभी के लिए बहुत कारगर होगी खुद भी करें और दूसरे बच्चों तक भी इस सन्देश को पहुंचाएं।

उज्जैन के पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि नव संवत्सर में नवग्रहों के बीच मंत्रिमंडल में इस बार राजा बुध और मंत्री चंद्रमा रहेंगे। पूरे वर्ष बुद्धदेव का आधिपत्य रहेगा। बुद्ध कन्या राशि का स्वामी है। अंग्रेजी नववर्ष की शुरुआत कन्या लग्न में ही होगी।

वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को एक शुभ ग्रह माना गया है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को भौतिक, शारीरिक और वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है।

किसी भी जातक का अंगूठा भी उसके  स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कई बातें बता सकता है।हस्तरेखीय ज्योतिष अंगूठे को ज्ञान का पिटारा कहता है जिसके हरेक पोर में व्यक्ति के विषय में काफी रहस्य छुपा होता है। इस पिटारे की एक मात्र चाभी है हस्त रेखा विज्ञान का सूक्ष्म ज्ञान अर्थात जिसने हस्तरेखा विज्ञान का सूक्ष्मता से अध्ययन किया है वह इस पर लगा ताला खोल सकता है।

ज्योतिष अनुसार ग्रहों की चाल बदलती रहती है। ये एक राशि से निकलकर दूसरी, तीसरी, चौथी, आदि द्वादश राशियों में भ्रमण करते रहते हैं। इन्हीं के अनुसार ये अपना फल प्रदान करते हैं।

24 जनवरी 2020 को सायंकाल शनि अपना राशि परिवर्तन कर रहे है। अब शनिदेव धनु से मकर राशि मे प्रवेश कर रहे है। शनि एक राशि मे ढाई साल रहते है और जब विपरीत फल देते है तो लोग त्राहिमाम करने लगते है।

यदि जन्मकुंडली मांगलीक होगी तो विवाह होकर भी तलाक हो जाता है। किन्तु ध्यान रहे किसी भी हालत में सप्तमेश को वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए।

उतारे की वस्तु सीधे हाथ में लेकर नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर की ओर सात अथवा ग्यारह बार घुमाई जाती है। इससे वह बुरी आत्मा उस वस्तु में आ जाती है।