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श्राद्ध में खीर बनाने के पीछे एक वजह ये है कि चावल को धर्म ग्रंथों में हविष्य अन्न कहा गया है यानी देवताओं का अन्न, जिसे अग्नि को अर्पित करने पर देवताओं सहित पितर भी तृप्त होते हैं।

श्राद्ध पक्ष को लेकर लोगों में यह गलत धारणा बनी हुई कि यह अशुभ समय होता है। इस दौरान कोई नई चीज नहीं खरीदनी चाहिए। इन दिनों नई चीज खरीदने से पितर नाराज होते हैं।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पितृ पक्ष का पालन किया जाता है. पितरों के खुश और सुखी रहने से परिवार में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।

जिन माता-पिता ने हमारी आयु, आरोग्यता तथा सुख सौभाग्य की अभिवृद्धि के लिए अनेक प्रयास किये, उनके ऋण से मुक्त न होने पर हमारा जन्म लेना निरर्थक होता है। इसे उतारने में कुछ अधिक खर्च भी नहीं होता।

यदि उक्त विधि को करना किसी के लिए संभव न हो, तब वह जल को पात्र में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके तर्पण कर सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार वात दोष होने से गठिया रोग उत्पन्न होता है जिसमें यूरिक एसिड की मात्रा कम हो जाती है। शनि ग्रह वात प्रकृति का है और रोग को धीरे-धीरे बढ़ाता है। शुक्र ग्रह वात-कफ प्रकृति का है। यह शरीर में हार्मोन को संतुलित रखता है

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ की उंगलियों का किस्मत के साथ बहुत बड़ा कनेक्शन है। उंगलियों की बनावट, लंबाई और चौड़ाई को देखकर किसी भी इंसान के व्यक्तित्व, स्वभाव और भविष्य के बारे में जाना जा सकता है।

पी. चिदंबरम का विवादों से नाता कभी छूट नहीं पाया। चिदंबरम पर संसद में हिंदी भाषी सांसद और हिंदुओं के खिलाफ टिप्पणी करने जैसे कई आरोप लगे। चिदंबरम पर यह भी आरोप लगा कि वह राजीव गांधी ट्रस्ट के निदेशकों में से एक हैं।

इस बार बहनों के लिए अच्छी बात यह है कि उन्हें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिेए किसी खास समय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

देवगुरु बृहस्पति इस समय वृश्चिक राशि में हैं। अभी तक बृहस्पति वक्री थे। अब 11 अगस्त की शाम से बृहस्पति मार्गी हो रहे हैं। यहां पर बृहस्पति मंगल के प्रभाव में होंगे।