Babri Masjid

हुप्रतीक्षित अयोध्या मामले में आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। इसे देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा के बहुत ज्यादा इंतजाम किए गए हैं। इस समय अयोध्या पूरी तरह अभेद किले में तब्दील कर दी गई है। फैसले को देखते हुए हर प्रकार की सतकर्ता बरती जा रही है। रात को नए सिरे से हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया।

केंद्र ने उत्तर प्रदेश की मदद के लिए चार हजार अर्धसैनिक बल भेजे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गृह मंत्रालय ने 40 कंपनी अतिरिक्त सुरक्षा बल उत्तर प्रदेश को उपलब्ध कराए हैं। उत्तर प्रदेश में तत्काल प्रभाव से धारा 144 लागू कर दी गई है।

इस मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद देश की शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। तभी से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने से पहले इस मामले में फैसला आ जाएगा।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा 'अयोध्या पर आज सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ रहा है। पिछले कुछ महीनों से सुप्रीम कोर्ट में निरंतर इस विषय पर सुनवाई हो रही थी, पूरा देश उत्सुकता से देख रहा था। इस दौरान समाज के सभी वर्गों की तरफ से सद्भावना का वातावरण बनाए रखने के लिए किए गए प्रयास बहुत सराहनीय हैं।'

कार्तिक महीने में अयोध्या श्रद्धालुओं से भर चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक 15 से 20 लाख श्रद्धालु अयोध्या में मौजूद हैं। अयोध्या इस समय हाईअलर्ट पर है।

देश में मुसलमानों के प्रमुख संगठन जमीयत उलेमा ए हिन्द ने बुधवार को कहा कि राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर उच्चतम न्यायालय का फैसला उसे स्वीकार्य होगा। साथ ही संगठन ने मुस्लिमों से फैसले का सम्मान करने की अपील भी की।

अयोध्या राम जन्मभूमि(राम मंदिर) विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई समाप्त होने के बाद अब इस मामले में फैसले का इंतजार है। इसपर फैसले को ध्यान में रखते हुए दोनों ही पक्षों की तरफ से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की जा रही है।

इकबाल अंसारी ने कहा कि वह खुश हैं कि मामला अब अपने तार्किक अंजाम तक पहुंच रहा है।अंसारी के पिता हाशिम अंसारी बाबरी मस्जिद मामले में सबसे पुराने वादी थे।

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में फिर से एक नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई में ये लगभग तय हो गया है कि अब ये मामला एक बार फिर मध्यस्थता की ओर जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू महासभा राम मंदिर मामले में मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है। उसने कहा है कि बिना सभी पक्षों की बात सुने मध्यस्थता का आदेश नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम हैरान हैं कि विकल्प आजमाए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है!!