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सीएम योगी बेहट की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में हर जगह मोदी-मोदी की गूंज है। सीएम योगी बोले कि हमने जो कहा वह कर दिखाया। किसानों को कर्ज से निकाला।

लोकसभा चुनाव 2019 में गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा है। प्रियंका गांधी के राजनीति में आने के बाद लगातार विपक्षी पार्टियों के नेताओं का कांग्रेस में शामिल होने का सिलसिला जारी है। कांग्रेस विपक्षी पार्टियों से नाराज नेताओं को अपने खेमे में शामिल करने से गुरेज नहीं कर रही है. कांग्रेस में सपा और बसपा के नेता भी शामिल हो रहे हैं।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कि है। बता दें, बसपा ने 11 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। अमरोहा से दानिश अली को टिकट मिला है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है। बसपा प्रमुख ने अपने भतीजे आकाश आनंद को भी स्टार प्रचारक बनाया है। आकाश युवा चेहरा हैं और वे पार्टी से नौजवानों को जोड़ने का काम करेंगे।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा)  सुप्रीमो मायावती ने ऐलान किया है कि वह इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि अभी मेरे जीतने से ज्यादा गठबंधन की सफलता ज्यादा जरूरी है।

मायावती पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मायावती हमारे नेता पर शौक़ीन होने के आरोप लगाने से पहले अपने गिरेवान में झाँक लेती तो ठीक था। जो महिला रोज फेशियल कराती हो वो महिला किसी के शौक़ीन होने पर सवाल कर रही है। विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि मायावती खुद रोज फेशियल करवाती हैं।

मायावती ने दो टूक कहा है कि भारतीय जनता पार्टी को शिकस्तत देने के लिए सपा-बसपा का गठबंधन ही काफी है। इसके साथ ही उन्होंतने कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि वह जबरदस्ती सीट छोड़ने का भ्रम न फैलाए।

सपा-बसपा ने रायबरेली और अमेठी सीट छोड़ने के पीछे की वजह शिष्टाचार बताया है। हालांकि कांग्रेस और सपा-बसपा के बीच अभी तक किसी तरीके के गठबंधन की बात सामने नहीं आई है।

संजय दत्त ने 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ने का फैसला किया था लेकिन मुंबई बम धमाकों में नाम होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने उन पर सख्ती बरती और वे चुनाव नहीं लड़ पाए।

2007 से 2012 के बीच बसपा शासनकाल के दौरान नेतराम प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के तौर पर तैनात थे और ताकतवर अफसरों में उनकी गिनती होती थी। बताया जाता है कि कैबिनेट मंत्रियों को भी नेतराम से मिलने के लिए मुख्यमंत्री से मिलने की तरह समय लेना पड़ता था।