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आखिरकार सपा-बसपा के गठबंधन में आ गई दरार

मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि, चुनाव नतीजों से साफ है कि बेस वोट भी सपा के साथ खड़ा नहीं रह सका है। सपा की यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं।

मायावती के तेवर देखकर लग रहा है कि उनका गठबंधन से मन भर गया है ऐसे में अखिलेश यादव ने भी जो संकेत दिए उससे भी लग रहा है कि उनका भी गठबंधन से मोहभंग हो चुका है।

यूपी के बिजनौर जिले के नजीबाबाद में दिनदहाड़े अज्ञात बदमाशों ने बहुजन समाज पार्टी के नेता हाजी एहसान और उनके भांजे शादाब की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देकर बदमाश मौके से फरार हो गए, फायरिंग से बाजार में अफरा-तफरी मच गई।

इस चुनाव में डिंपल और अक्षय की सीट हारकर सपा को शिवपाल यादव की कमी जरूर खली होगी। माना जाता है कि कन्नौज सीट के स्थानीय सपा नेता और कार्यकर्ता शिवपाल यादव के ज्यादा करीबी हैं

दरअसल, किसी भी लड़ाई को जीतने के लिए सेना की जरूरत होती है। थल सेना और वायुसेना दोनों की। यदि क्षेत्र समुद्र से लगा हुआ है, तो नौसेना भी चाहिए। लेकिन यहां भाजपा को जो जमीन जीतनी थी, उसके लिए उसे थल सेना और वायुसेना की जरूरत थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवपाल भले ही अपनी पार्टी को कोई सीट नहीं दिला पाए, मगर सपा को नुकसान जरूर पहुंचाया। उन्हें अक्षय यादव की हार का कारण माना जा रहा है।

यह साफ है कि समाजवादी पार्टी ने इन सीटों पर बसपा को अपने वोट स्थानांतरित किए हैं, लेकिन बसपा का वोट सपा के उम्मीदवारों को स्थानांतरित नहीं हुआ। गठबंधन की ओर एक बड़ी दुर्घटना राष्ट्रीय लोकदल रही है।

एग्जिट पोल्स में NDA को बहुमत मिलने की बात सामने आ रही है ऐसे में इसका असर विरोधी दलों पर दिखाई दे रहा है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमों मायावती ने एग्जिट पोल आने के बाद ही पार्टी को लेकर बड़ा कदम उठा लिया है।

एक अधिकारी ने कहा, "हमें भाजपा के बारे में तो नहीं पता लेकिन बसपा उससे कहीं अच्छा करने जा रही है जैसा कि दिखाया जा रहा है। एग्जिट पोल को अपने हिसाब से बनाया जा सकता है लेकिन नतीजों को नहीं।"