Citizenship amendment bill 2019

अनुच्छेद 370, राम मंदिर और नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) जैसे अहम पड़ाव पार कर चुकी मोदी सरकार का अगला कदम हो सकता है जनसंख्या नियंत्रण कानून और समान नागरिक संहिता (कॉमन सिविल कोड) यानी सीसीसी को लागू करना।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार देर रात नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 को मंजूरी दे दी। इससे यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने वाला एक अधिनियम बन गया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के खिलाफ बुधवार को युवा कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के खिलाफ 24 घंटे के बुलाए गए बंद का गुरुवार को कुछ खास असर नहीं दिखा।

नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया है। इसका राज्यसभा से भी पास होना मोदी सरकार के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है। बता दें कि इस बिल के पक्ष में राज्यसभा में 125 वोट मिले और इसके खिलाफ 105 वोट पड़े।

नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है। यह याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की ओर से फाइल की गई है। मुस्लिम लीग ने इस बिल को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करार दिया है।

इसपर फाइनल वोटिंग से पहले बिल में संशोधन को लेकर कांग्रेस और टीएमसी ने अपना 1-1 प्रस्ताव वापस ले लिया था। विपक्ष की तरफ से बिल में 14 संशोधन को लेकर प्रस्ताव दिया गया था, जिसमें से एक भी पास ना हो सका।

संजय राउत ने कहा कि इस देश से घुसपैठियों को बाहर निकलाना चाहिए, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का हनन हुआ है. जिन लाखों-करोड़ों को यहां पर ला रहे हैं, तो क्या उन्हें वोटिंग का हक मिलेगा अगर इन्हें 20-25 साल वोटिंग का हक नहीं मिलता है तो बैलेंस रहेगा।

नागरिकता संसोधन बिल पर सांसद मीनाक्षी लेखी ने पेश किए ऐसे आंकड़े जिससे विपक्ष को जवाब देते नहीं बना

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बिल की कॉपी भी फाड़ी और साथ ही जेडीयू दफ्तर में तोड़-फोड़ की।

संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के साथ ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धर्म के चलते प्रताड़ित होकर भारत आए गैर-इस्लामी धर्म को छोड़कर हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों की नागरिकता का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।